नावाडीह के कुमार मोतिक को खोरठा में लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल, 24 सितंबर को मिलेगा सम्मान

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कुमार मोतिक

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बोकारो के कुमार मोतिक ने यूजी के बाद पीजी में भी खोरठा विषय में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है. जानिए उनके संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी.

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नावाडीह. बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत मानपुर गांव निवासी कुमार मोतिक (मोतीलाल महतो) ने खोरठा भाषा के अध्ययन में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक और उपलब्धि हासिल की है. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के एमए खोरठा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में सत्र 2024-26 के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए उन्हें गोल्ड मेडल प्रदान किया जायेगा. विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में 24 सितंबर 2026 को उन्हें यह सम्मान मिलेगा.

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स्नातक के बाद स्नातकोत्तर में भी हासिल किया स्वर्ण पदक

कुमार मोतिक की उपलब्धि इसलिए खास है, क्योंकि उन्होंने स्नातक स्तर पर भी खोरठा विषय में गोल्ड मेडल हासिल किया था. अब स्नातकोत्तर स्तर पर भी स्वर्ण पदक प्राप्त कर उन्होंने अपनी शैक्षणिक प्रतिभा को लगातार साबित किया है. इसके अलावा वे यूजीसी-नेट भी क्वालिफाई कर चुके हैं.

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खोरठा भाषा में यूजी और पीजी, दोनों स्तरों पर गोल्ड मेडल हासिल करना उनकी निरंतर मेहनत और अध्ययन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

किसान परिवार से निकलकर हासिल की कामयाबी

कुमार मोतिक मानपुर के एक सामान्य किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता हीरालाल महतो और माता चंद्रमणि देवी हैं. परिवार की आजीविका कृषि पर निर्भर है. ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बावजूद कुमार ने पढ़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाये रखी.

मेहनत, अनुशासन और नियमित अध्ययन के बल पर उन्होंने उच्च शिक्षा में अपनी अलग पहचान बनायी. उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायी मानी जा रही है.

विभाग ने दी बधाई

कुमार मोतिक की उपलब्धि पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में भी खुशी है. विभाग के समन्वयक सह खोरठा विभागाध्यक्ष डॉ विनोद कुमार ने उन्हें बधाई देते हुए इसे विभाग के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

विभाग की प्रोफेसर सुशीला कुमारी के अलावा शोधार्थी सुचित कुमार राय और प्रवीण कुमार ने भी कुमार मोतिक को उनकी सफलता पर शुभकामनाएं दीं.

मानपुर गांव में भी खुशी का माहौल

कुमार मोतिक को दोबारा गोल्ड मेडल मिलने की खबर से मानपुर गांव में भी खुशी का माहौल है. परिवार, ग्रामीणों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है. खोरठा साहित्यकार वासु बिहारी तथा खोरठा मांय माटी (उलगुलान) के अध्यक्ष डॉ तारकेश्वर महतो 'गरीब' ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं.

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खोरठा के विद्यार्थियों के लिए बने प्रेरणा

कुमार मोतिक की सफलता ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा में अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं. खोरठा में स्नातक और स्नातकोत्तर, दोनों स्तरों पर गोल्ड मेडल हासिल करने के साथ यूजीसी-नेट क्वालिफाई करना उनकी अकादमिक उपलब्धियों को और खास बनाता है.

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