बोकारो में सियार के हमले के बाद अचानक क्यों बढ़ी विभाग की चिंता, 2 मौतों के बाद लिया गया यह फैसला

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बोकारो में सियार के हमले के बाद विभाग की चिंता अचानक बढ़ गई।

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बोकारो के कसमार प्रखंड में सियार के हमले में 12 ग्रामीण घायल हुए थे, जिनमें से दो की दुखद मौत हो गई है. इस घटना के बाद वन विभाग हरकत में आ गया है और सभी घायलों के स्वास्थ्य की गंभीरता से समीक्षा कर रहा है.

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बोकारो. कसमार प्रखंड में 12 अगस्त को सियार के हमले में घायल हुए 12 ग्रामीणों में से दो की मौत के बाद अन्य घायलों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गयी है. लगातार दो मौतों के बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी घायलों के उपचार, वैक्सीन और वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की दोबारा समीक्षा शुरू कर दी है. विभागीय पहल पर केंद्रीय वन पर्यावरण सुरक्षा सह प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विष्णु चरण महतो शुक्रवार को चार घायलों को लेकर रिम्स रांची पहुंचे. वहां सभी का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया. शेष घायलों को भी रिम्स ले जाकर जांच कराने की तैयारी चल रही है.

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उपचार और वैक्सीन की स्थिति की हो रही समीक्षा

बोकारो के प्रशिक्षु डीएफओ संदीप कुमार शिंदे ने बताया कि वन विभाग मामले को गंभीरता से ले रहा है. 12 अगस्त की घटना के बाद प्रत्येक घायल को कहां-कहां उपचार मिला, कितनी वैक्सीन दी गयी और वर्तमान में उसकी स्वास्थ्य स्थिति कैसी है, इसकी जानकारी जुटायी जा रही है. उन्होंने कहा कि उपचार की प्रक्रिया में कहीं कोई कमी रह गयी हो, तो उसे समय रहते दूर करने का प्रयास किया जायेगा.

वन विभाग की ओर से सभी घायलों को रिम्स ले जाकर चिकित्सकीय जांच कराने की व्यवस्था की जा रही है. इसके लिए विभाग की ओर से वाहन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं.

सिर और नसों के आसपास के घाव में विशेष सतर्कता

प्रशिक्षु डीएफओ संदीप कुमार शिंदे के अनुसार, सियार के काटने की स्थिति में घाव की जगह भी महत्वपूर्ण होती है. सिर और मस्तिष्क के आसपास या ऐसे हिस्सों में काटे जाने पर जहां महत्वपूर्ण नसें होती हैं, चिकित्सकीय निगरानी और समय पर उपचार जरूरी होता है. उन्होंने कहा कि विभाग यह भी जानकारी जुटा रहा है कि हमले के बाद प्रत्येक घायल को निर्धारित उपचार और वैक्सीन का पूरा प्रोटोकॉल मिला या नहीं.

यदि समीक्षा के दौरान किसी घायल के उपचार में किसी स्तर पर कमी सामने आती है, तो उसे चिकित्सकीय स्तर पर दूर कराने का प्रयास किया जायेगा. विभाग का जोर फिलहाल सभी घायलों की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी लेने और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर है.

12 अगस्त को छह गांवों में हुआ था हमला

गौरतलब है कि 12 अगस्त को कसमार प्रखंड के नावाडीह, बगदा, टांगटोना, पुरनी बागियारी, रघुनाथपुर और ललमटिया में सियार के हमले में 12 ग्रामीण घायल हुए थे. इनमें दुर्गापुर पंचायत के ललमटिया निवासी 33 वर्षीय बुधनी देवी की तीन सितंबर को मौत हो गयी थी. वहीं, टांगटोना पंचायत के तेलियाडीह निवासी 75 वर्षीय राधा महतो की 17 सितंबर को मौत हुई.

दो मौतों के बाद वन विभाग ने शेष घायलों के स्वास्थ्य की निगरानी और उपचार संबंधी रिकॉर्ड की समीक्षा तेज कर दी है. चार घायलों की रिम्स में जांच के बाद अब अन्य घायलों को भी वहां ले जाने की तैयारी की जा रही है.

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