झारखंड में एमएमडीआर एक्ट पर क्यों शुरू हुआ राजनीतिक घमासान? बाबूलाल मरांडी ने सरकार से मांगे ये 3 बड़े जवाब
संबोधित करते पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी व उपस्थित अन्य | Prabhat Khabar Network
झारखंड में एमएमडीआर एक्ट में संशोधन को लेकर सियासी घमासान जारी है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर संसद में चुप्पी साधने और अब विज्ञापनों से जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है. उन्होंने सरकार से एक्ट के असल प्रभावों पर श्वेत पत्र की मांग की है.
बोकारो. झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने एमएमडीआर (माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट में हुए संशोधन को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. रविवार को बोकारो स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार संसद में चुप्पी साधने के बाद विज्ञापनों और बयानों के जरिये जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यदि एमएमडीआर एक्ट ही राज्य की प्रमुख समस्या है, तो सरकार को अपनी खनन नीति, प्रशासनिक स्तर पर सामने आ रही कमियों और लंबे समय से बंद पड़ी खदानों की स्थिति पर भी जवाब देना चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संशोधित कानून का झारखंड के राजस्व, खनन उद्योग और रोजगार पर वास्तविक प्रभाव क्या होगा.
ये भी पढ़ें: PLI और RPLI से बोकारो पश्चिमी मंडल ने जुटाए 3.83 करोड़, 24 सितंबर को ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में चलेगा विशेष अभियान
राजस्व को लेकर सरकार से मांगा तथ्य
मरांडी ने दावा किया कि केंद्र सरकार के संशोधनों के बाद पिछले वर्षों में राज्यों के खनिज राजस्व में वृद्धि हुई है. केंद्र सरकार की ओर से भी अगस्त 2026 में जारी जानकारी में कहा गया था कि एमएमडीआर संशोधन के बाद राज्यों को खनन क्षेत्र से मिलने वाले प्रमुख राजस्व स्रोत जारी रहेंगे और राज्यों को खनिज क्षेत्र के राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलता रहेगा.
वहीं, झारखंड सरकार की ओर से इस संशोधन को लेकर राजस्व पर संभावित असर की चिंता जताई गई है. अगस्त में राज्य के वित्त मंत्री ने संशोधित एमएमडीआर कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी और राजस्व नुकसान की आशंका जतायी थी.
रोजगार और खनन उद्योग पर भी उठाये सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय एक्ट के प्रावधानों और उसके संभावित प्रभावों से जुड़े तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए. उन्होंने खनन उद्योग, रोजगार और राज्य के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव का स्पष्ट आकलन सामने रखने की मांग की.
मरांडी ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार कानून के वास्तविक प्रावधानों को सामने रखने के बजाय जनता के बीच भ्रम और भय का माहौल बना रही है. उन्होंने कहा कि सरकार को विज्ञापनों के बजाय अपने कामकाज और खनन क्षेत्र की स्थिति का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए.
मौके पर पूर्व मंत्री कृष्ण कुमार मुन्ना, जयदेव राय, लक्ष्मण नायक, अर्चना सिंह, कुमार अमित समेत भाजपा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे.
ये भी पढ़ें: बोकारो में ठेका मजदूरों का बड़ा प्रदर्शन: 40% छंटनी की आशंका के बीच प्रबंधन को दी हड़ताल की चेतावनी
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए