झारखंड:बोकारो की बिटिया शांभवी शांडिल्य को Google ने दिया 55 लाख का पैकेज, सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर बढ़ाएगी मान

Updated at : 19 Dec 2023 11:18 PM (IST)
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झारखंड:बोकारो की बिटिया शांभवी शांडिल्य को Google ने दिया 55 लाख का पैकेज, सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर बढ़ाएगी मान

शांभवी शांडिल्य 1 जुलाई 2024 को गूगल कंपनी के बेंगलुरु स्थित कार्यालय में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ज्वाइन करेगी. डीवीसी कर्मी पिता ने कहा कि उनका सपना था कि उनकी पुत्री गूगल में कार्य करे और उनके सपने को बेटी ने पूरा किया. प्रत्येक माता-पिता को अपने बच्चों को प्रमोट करने की जरूरत है.

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बोकारो थर्मल: झारखंड के बोकारो जिले के बोकारो थर्मल निवासी डीवीसीकर्मी अश्विनी कुमार मिश्रा एवं वंदना मिश्रा की पुत्री एवं आईआईआईटी ग्वालियर के एमटेक (इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) की छात्रा शांभवी शांडिल्य को गूगल (Google) ने 55 लाख के पैकेज पर प्लेसमेंट दिया है. शांभवी 1 जुलाई 2024 को गूगल कंपनी के बेंगलुरु स्थित कार्यालय में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ज्वाइन करेगी. छात्रा कहती है कि गूगल जैसी कंपनी में चयन होना मेरे लिए काफी गर्व की बात है. शांभवी ने कहा कि सफलता एवं पढ़ाई के पीछे माता-पिता का काफी योगदान रहा है. दोनों ने अच्छी शिक्षा दी और हमेशा प्रमोट किया. पिता ने कहा कि उनका सपना था कि उनकी पुत्री गूगल में कार्य करे और उनके सपने को बेटी ने पूरा किया.

शांभवी शांडिल्य की सफलता से परिवार में खुशी

शांभवी शांडिल्य ने अपनी आईसीएसई दसवीं की परीक्षा बोकारो थर्मल के कार्मेल स्कूल से 94.8 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण की है, जबकि बाहवीं की परीक्षा सेंट्रल एकेडमी कोटा राजस्थान से 93.8 फीसदी अंक के साथ पास की है. आईआईआईटी ग्वालियर से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीटेक करने के बाद शांभवी एमटेक कर रही है, जो कि मई 2024 में पूरा हो जाएगा. उसने इंटर्नशिप समर 2022 एवं 2023 में दो बार गूगल से ही किया था. गूगल में अपने प्लेसमेंट के चयन पर शांभवी सहित उसके माता पिता काफी प्रफुल्लित हैं.

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सफलता में माता-पिता का अहम योगदान

शांभवी शांडिल्य कहती है कि गूगल जैसी कंपनी में चयन होना उसके लिए काफी गर्व की बात है. सफलता एवं पढ़ाई में उसके माता-पिता का काफी योगदान रहा है. दोनों ने हमेशा बचपन से ही अच्छी शिक्षा देने का कार्य किया और दोनों ने ही बेहतर तरीके से प्रमोट करने का कार्य किया. कार्मेल स्कूल के शिक्षक अर्जुन शाह एवं प्राचार्य सिस्टर जसिंता का भी काफी सराहनीय योगदान रहा. डीवीसी कर्मी पिता ने कहा कि उनका सपना था कि उनकी पुत्री गूगल में कार्य करे और उनके सपने को बेटी ने पूरा करने का कार्य किया. प्रत्येक माता-पिता को अपने बच्चों को बेहतर तरीके से प्रमोट करने की जरूरत है.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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