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Bokaro News : बोकारो स्टील प्लांट में पंडित जवाहरलाल नेहरू की सपने की है झलक

Updated at : 13 Nov 2025 10:57 PM (IST)
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Bokaro News : बोकारो स्टील प्लांट में पंडित जवाहरलाल नेहरू की सपने की है झलक

Bokaro News : 14 नवंबर को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर विशेष, आधुनिक भारत के मंदिरों के निर्माण के सपनों को लेकर 1955 में रूस की यात्रा पर निकले थे पंडित नेहरू.

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सुनील तिवारी, बोकारो, 62 साल से राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्ती भूमिका निभा रहा बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में आधुनिक भारत के निर्माता देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू के सपने की झलक है. आज (14 नवंबर) पंडित नेहरू की जयंती पर बीएसएल की स्थापना और इसके पीछे के इतिहास की चर्चा समसामयिक है. द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद दुनिया पूंजीवाद (अमेरिका) व साम्यवाद (रूस) के दो खेमों में बंट चुकी थी. भारत को तब नयी-नयी आजादी मिली थी. देश के विकास के लिए स्टील, एयरक्राफ्ट, ऑटो इंडस्ट्री, पनबिजली परियोजना आदि उद्योगों की जरूरत थी, जिससे बुनियादी ढांचा खड़ा किया जा सके. पं नेहरू आधुनिक भारत के मंदिरों के निर्माण के इन्हीं सपनों को लिए 1955 में सोवियत रूस की यात्रा पर निकले थे.

उर्लमाश कारखाने में बनी बीएसएल के लिए मशीन

तब पं नेहरू दिल्ली से लगभग 5000 किलोमीटर दूर सोवियत रूस की स्टील राजधानी येकातेरिनबर्ग शहर में थे. उनके साथ थीं भारत की पूर्व प्रधानमंत्री व उनकी पुत्री इंदिरा गांधी. पं नेहरू ने सोवियत रूस की यात्रा सात जून 1955 को शुरू की थी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत रूस के इस शहर में बड़े पैमाने पर लोहा गला कर स्टील बनाया जा रहा था. नेहरू मास्को से लेनिनग्राद की वृहद यात्रा पर निकले. इस दौरान उन्होंने स्टालिनग्राद, क्रीमिया, जॉर्जिया, अस्काबाद, ताशकंद, समरकंद, अल्टाई क्षेत्र, मैग्नीटोगोर्स्क व सवर्दलोव्स्क शहरों का भ्रमण किया. सवर्दलोव्स्क शहर का नाम बदल कर अब येकातेरिनबर्ग हो गया है. याकेतरिनबर्ग शहर में मौजूद हैवी इंजीनियरिंग प्लांट उर्लमाश से नेहरू काफी प्रभावित हुए. बाद में उर्लमाश कारखाने में ही बोकारो स्टील प्लांट के लिए भारी-भरकम मशीन बनायी गयी.

06 अप्रैल 1968 को इंदिरा गांधी ने बीएसएल की आधारशिला रखी थी

निकिता क्रुश्चेव के दौर के रूस ने भारत की जरूरतों का सम्मान किया. भारत में दो स्टील प्लांट बनाने के लिए जरूरी साजो-सामान व तकनीक देने पर राजी हो गया. रूस के इंजीनियर बोकारो (तत्कालीन बिहार) व भिलाई (तत्कालीन मध्य प्रदेश) आये. यहां पर उन्होंने भिलाई व बोकारो प्लांट को बनाने में पूरी मदद की. भिलाई भारत का पहला आधुनिक सरकारी स्टील प्लांट है. बोकारो का कारखाना इसके बाद अस्तित्व में आया. जब इंदिरा पीएम बनीं तो उनके पास इस विजन को पूरा करने का मौका व सामर्थ्य दोनों आया. 06 अप्रैल 1968 को इंदिरा गांधी ने बीएसएल की आधारशिला रखीं. प्लांट का पहला ब्लास्ट फर्नेंस 02 अक्तूबर 1972 को शुरू हुआ और स्टील का उत्पादन शुरू हो गया. बोकारो सार्वजनिक क्षेत्र में चौथा इस्पात कारखाना है. यह सोवियत संघ के सहयोग से 1965 में शुरू हुआ. शुरू में इसे 29 जनवरी 1964 को एक लिमिटेड कंपनी के तौर पर निगमित किया गया.

पं नेहरू की यात्रा से आधुनिक स्टील प्लांट लगने का रास्ता खुलापं नेहरू अपने जीवन काल में बोकारो स्टील प्लांट को आधुनिक भारत का मंदिर बनते हुए देखने का सपना पूरा नहीं कर पाये. वह इस प्लांट की तैयारी में ही थे कि 27 मई 1964 को उनका निधन हो गया. तब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने बीएसएल की फाइल को आगे बढ़ाया. 25 जनवरी 1965 को भारत व रूस के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुआ. पं नेहरू की इस यात्रा से भारत में भिलाई व बोकारो में आधुनिक स्टील प्लांट लगने का रास्ता खुला. दूरदर्शी नेहरू का मानना था कि स्टील अर्थव्यवस्था की ताकत का प्रतीक है. तब भारत जैसे नये-नवेले देश को ये तकनीक कोई भी सक्षम देश सहृदयता से देने को तैयार नहीं था. पं नेहरू ने रूस की तत्कालीन सरकार से इस बाबत बात की. इस मिशन में उन्हें कामयाबी भी मिली.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANAND KUMAR UPADHYAY

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By ANAND KUMAR UPADHYAY

ANAND KUMAR UPADHYAY is a contributor at Prabhat Khabar.

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