अपनी डफली अपना राग’ वाली यूनियन ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा...’ के रास्ते पर
Updated at : 23 Dec 2019 7:51 AM (IST)
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सुनील तिवारी : बोकारो : अपनी-अपनी डफली अपना-अपना राग अलापने वाली बोकारो स्टील प्लांट में सक्रिय मजदूर यूनियन अब मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा की राह पर हैं. मौजूदा परिस्थितियों में जिस तरह से मजदूर वर्ग पर हमले बढ़ने लगे हैं, उसके खिलाफ न केवल छोटे स्तर पर बल्कि बड़े स्तर पर […]
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सुनील तिवारी : बोकारो : अपनी-अपनी डफली अपना-अपना राग अलापने वाली बोकारो स्टील प्लांट में सक्रिय मजदूर यूनियन अब मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा की राह पर हैं. मौजूदा परिस्थितियों में जिस तरह से मजदूर वर्ग पर हमले बढ़ने लगे हैं, उसके खिलाफ न केवल छोटे स्तर पर बल्कि बड़े स्तर पर भी संगठनों के संगठित होने का सिलसिला शुरू हो गया है.
देश के अंदर विपक्षियों के द्वारा एक मंच पर आकर एक स्वर में अपनी आवाज को बुलंद करने की तर्ज पर ही बोकारो इस्पात संयंत्र के कर्मियों ने भी एक-दूसरे का हाथ पकड़ लिया है. केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर आठ जनवरी को सेल में देशव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है. इसको लेकर बोकारो में इंटक, सीटू, एटक, एक्टू, एचएमएस व एआइयूटीयूसी के नेता एक मंच पर आ गये है.
ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा ने शनिवार को बोकारो स्टील प्रबंधन को आठ जनवरी की हड़ताल से संबंधित नोटिस दी. मोर्चा की ओर से संयोजक सीटू के बीडी प्रसाद के नेतृत्व में एटक से रामाश्रय प्रसाद सिंह व बीके राम, सीटू से केएन सिंह व आरके गोराई, इंटक के बीएन उपाध्याय, एक्टू के देवदीप सिंह दिवाकर, एआईयूटीयूसी के आरएस शर्मा व सुभाष प्रमाणिक, एचएमएस के आरके वर्मा उपस्थित थे.
हड़ताल से पहले सभी ने मिलाया हाथ : वेतन समझौता, श्रमिक कानून व घटती सुविधाओं पर श्रमिक वर्ग नाराज है. इसको लेकर इंटक, सीटू, एटक, एक्टू, एचएमएस व एआइयूटीयूसी एक मंच पर आ रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय नेता एक मंच पर आते रहे हैं. लेकिन, स्थानीय स्तर पर दूरी रही है. लेकिन, इस बार आठ जनवरी की हड़ताल से पहले सभी ने हाथ मिला लिया है.
उधर, मोर्चा की ओर से हड़ताल को और अधिक असरदार बनाने के लिए जय झारखंड मजदूर समाज, झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन, क्रांतिकारी इस्पात मजदूर यूनियन सहित अन्य यूनियनों से भी संपर्क साधा जा रहा है. इसको लेकर बोकारो स्टील प्रबंधन भी बेचैन है.
इस बार नजर आ रही है व्यापक एकता : केंद्रीय ट्रेड यूनियन के अलावा बीएसएल में दर्जनों यूनियन कर्मियों के बीच सक्रिय रहती है. सभी का यही मानना होता है कि वह मजदूरों के लिए संघर्षरत हैं. उनके अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं. लेकिन, यह लड़ाई लड़ते समय जो व्यापक एकता नजर आनी चाहिए, वह एकता नजर नहीं आती थी.
इसका फायदा निश्चित रूप से प्रबंधन व सरकार को ही होता रहा है. कारण, संयंत्र में कार्यरत सभी यूनियनों के पीछे कोई न कोई कर्मी अवश्य लामबंद होता है. अर्थात, किसी संगठन के पीछे ज्यादा तो किसी संगठन के पीछे कम लोग जुड़े होते हैं. इसलिए इस बार सभी यूनियनों ने एक-दूसरे से हाथ मिला लिया है.
एक मंच पर आये इंटक, सीटू, एटक, एक्टू, एचएमएस व एआइयूटीयूसी के नेता
एक होकर लड़ने का फैसला : रामाश्रय
बचपन में एक बूढ़े व्यक्ति द्वारा अपने सभी बेटों को बुलाकर लकड़ी की गठरी एक साथ तोड़ने और अलग-अलग करके तोड़वाकर एकता का संदेश देने की कहानी सुनते थे. इस भावना को मजदूर वर्ग समझ नहीं पा रहा था. इस वजह से सरकार ने वेतन समझौता, अन्य सुविधा व भत्तों पर सीधी तरह से रोक लगा दी. अब मजदूरों ने एक होकर लड़ने का फैसला ले लिया है.
रामाश्रय प्रसाद सिंह, महासचिव-एटक, बोकारो
संबंद्धता से ऊपर उठकर संघर्ष : बीडी प्रसाद
सामान्यत: कर्मी संगठन से और संगठन अपने केंद्रीय संगठन से संबद्ध रहते हैं. कोई मांग सही होने के बावजूद संबंद्धताओं के कारण अक्सर संगठन में एकता नहीं हो पाती है. लेकिन, इस बार ऐसा दिखने लगा है कि कर्मी हो या संगठन अपनी संबद्धता से ऊपर उठकर संघर्ष करने को तैयार नजर आ रहे हैं. इस बार के संघर्ष में सभी मजदूरों के पक्ष में अपनी मांगों को लेकर गोल बंद हो रहे हैं.
बीडी प्रसाद, महासचिव-सीटू, बोकारो
फासीवादी ताकतें लगातार हावी : देवदीप
एक्टू अपने स्थापना से ही एकता व संघर्ष के नारे के साथ आगे बढ़ रही है. कभी भी ट्रेड यूनियनों के आपसी प्रतिस्पर्धा में विश्वास नहीं रखती है. मौजूदा समय में फासीवादी ताकतें लगातार हावी होती जा रही हैं. ऐसे में सभी ट्रेड यूनियनों को एकजुट होकर मजदूर वर्ग का नेतृत्व करते हुए इन ताकतों का विरोध करना होगा. अन्यथा, ये ताकतें मेहनतकश वर्ग सहित पूरे देश को तहस-नहस करके रख देंगी.
देवदीप सिंह दिवाकर, महासचिव-एक्टू, बोकारो
मजदूरों को एकता दिखानी होगी : राजेंद्र
केंद्र सरकार अपने बहुमत के मद में चूर होकर मनमाने तरीके से बिल पास करा कर देश की पूरी व्यवस्था को नष्ट करने पर लगी हुई है. उसे देखते हुए ऐसा लग रहा है कि देश में श्रमिक व कर्मचारी वर्ग के सामने जल्द ही गुलामों की स्थिति निर्मित होने वाली है. ऐसे में संगठनों के साथ-साथ मजदूरों को भी अपनी एकता दिखानी होगी. हड़ताल की तैयारी में सभी यूनियन व मजदूर एकजुट हो गये हैं.
राजेंद्र सिंह-महासचिव-किम्स (एचएमएस) बोकारो
आठ जनवरी की हड़ताल की मांग व प्रासंगिकता
वेतन समझौता व पेंशन योजना तत्काल लागू हो, मंदी-छंटनी-महंगाई पर रोक लगे.
निजीकरण बंद करने व राष्ट्रीय संपत्ति बेचना बंद करने, श्रम कानूनों में मजदूर-विरोधी संशोधन.
21 हजार रुपया मासिक न्यूनतम मजदूरी देने, 10 हजार रुपया मासिक पेंशन देने.
तय न्यूनतम मजदूरी लागू करने, नयी पेंशन योजना वापस लेने.
सभी स्कीम कर्मियों को श्रमिक का दर्जा व स्कीमों में निजीकरण पर रोक.
बीमार व बंद उद्योगों को शुरू करने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को चालू करने.
समान काम के लिए समान वेतन व लाभ देने.
सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश पर रोक लगाने.
बैंक, बीमा, प्रतिरक्षा के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को रोकने आदि.
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