बीएसएल के पूर्व एमडी बीएल क्षत्रिय के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी

Updated at : 05 Mar 2019 2:22 AM (IST)
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बीएसएल के पूर्व एमडी बीएल क्षत्रिय के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी

भिलाई स्टील प्लांट में तत्कालीन नगर सेवा विभाग के प्रभारी थे क्षत्रिय बोकारो : बोकारो स्टील प्लांट के पूर्व एमडी बीएल क्षत्रिय के खिलाफ भिलाई के दुर्ग कोर्ट ने शनिवार को स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. जू की जगह चार बाघ शावक सहित 16 वन्य प्राणी को सर्कस में बेच देने के खिलाफ […]

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भिलाई स्टील प्लांट में तत्कालीन नगर सेवा विभाग के प्रभारी थे क्षत्रिय

बोकारो : बोकारो स्टील प्लांट के पूर्व एमडी बीएल क्षत्रिय के खिलाफ भिलाई के दुर्ग कोर्ट ने शनिवार को स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. जू की जगह चार बाघ शावक सहित 16 वन्य प्राणी को सर्कस में बेच देने के खिलाफ में कार्रवाई की गयी है. मामला वन विभाग ने दर्ज कराया था. यह मामला तब का है, जब श्री क्षत्रिय भिलाई स्टील प्लांट में नगर सेवा विभाग के प्रभारी पद पर कार्यरत थे.
श्री क्षत्रिय सहित बीएसपी के तत्कालीन सुप्रीडेंटेंट पीएंडइ वाइपी सोंधी, डीजीएम फाइनांस एसएल गुप्ता व सीटीए बीएसपी केएल राघवेंद्र के खिलाफ भी स्थायी वारंट भी जारी किया गया है. सभी अधिकारी रिटायर हो चुके हैं. इनमें से न्यायालय को वाइपी सोंधी के निधन होने की सूचना पहले ही दे दी गयी है. शेष तीनों फरार हैं.
वन विभाग की ओर से न्यायालय को यह जानकारी दी गयी कि इस विषय में भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों से संपर्क कर आरोपी अधिकारियों के बारे में पूछताछ की गयी, पर किसी के बारे में जानकारी नहीं दी गयी. आखिर में न्यायालय ने धारा 299 के तहत बीपीएस के तीनों अधिकारियों के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर फरार घोषित कर दिया गया.
वर्ष 1990 में पश्चिम बंगाल सरकार ने तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार से अंपायर सर्कस में अतिरिक्त वन्य प्राणी के संबंध में पत्राचार किया. पश्चिम बंगाल सरकार ने पूछा कि ये अतिरिक्त वन्य प्राणियों को भिलाई से बताया जा रहा है. क्या यह सही है. इस पत्र से वन विभाग के अफसर सकते में आ गये हैं. विभाग की ओर से ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गयी थी.
तत्कालीन वन परिक्षेत्रिय अधिकारी योगेश पांडेय को इस मामले के जांच के आदेश दिये गये. जांच में ही वन प्राणियों को कोलकाता के एक जू में भेजने की जगह सर्कस में बेचे जाने के मामले का खुलासा हुआ. मैत्री बाघ से इन वन्य प्राणियों को कोलाकाता के चिड़ियाघर भेजे जाने के लिए रवाना किया गया. कोलकाता तक ले जाने के लिए विभाग से ट्रांजिट पास लेना अनिवार्य था. लेकिन अधिकारियों ने इसकी अनदेखी की.
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