रांची में भारत भारती की गोष्ठी, विनय पत्राले ने दिया राष्ट्रीय एकता का संदेश

भारत भारती की गोष्ठी
Bharat Bharti: भारत भारती के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विनय पत्राले रांची पहुंचे और होटल ग्रीन एकड़ में समाजसेवी, प्रबुद्ध नागरिक एवं पूर्व सैनिकों के साथ विचार गोष्ठी की. उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और गुरु तेगबहादुर के बलिदान को याद करने पर जोर दिया. गोष्ठी में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधियों ने शिरकत की.
Bharat Bharti: भारत भारती के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विनय पत्राले अपने झारखंड के त्रिदिवसीय दौरे के प्रथम पड़ाव पर रांची में हैं. इस अवसर कल रांची के होटल ग्रीन एकड़ में भारत भारती से जुड़े , विभिन्न क्षेत्र में कार्यरत समाज सेवी एवं प्रबुद्ध नागरिकों एवं पूर्व सैनिकों के साथ एक विचार गोष्ठी का आयोजन भारत भारती, झारखण्ड के कार्यकारी अध्यक्ष वेटरन डॉ अनिरूद्ध सिंह की पहल पर किया गया. मुख्य अतिथि सह प्रवक्ता के रूप में बोलते हुए पत्राले ने राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल के सार्द्ध शताब्दी वर्ष मनाए जाने के संदर्भ में एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना पर प्रकाश डाला. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के हर बड़े और मध्यम श्रेणी का नगर एक लघु भारत है जहां अनेक राज्यों के लोग निवास करते हैं.
रांची में भी बंगाली, गुजराती, मारवाड़ी, मलयाली, ओड़िया, उत्तराखंडी, पंजाबी, सिख आदि समाज के लोग निवास करते हैं जिनकी सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान, भाषा, खानपान, पहनावा, आदि अलग अलग हैं . भारत भारती का यह प्रयास है कि एक नगर में निवास करने वाले हर समाज के लोगों के बीच आपसी तालमेल हो और अन्य राज्यों की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में दूसरे राज्य के लोगों की भागीदारी हो. इससे राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा और सामाजिक समरसता का भाव भी बढ़ेगा. रांची में भी इस दिशा में प्रयास होना चाहिए, यही भारत भारती का मुख्य उद्देश्य है.
उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा में अपने प्राणों और शिष्यों तथा पुत्रों की आहुति देने वाले सिख गुरुओं को याद करने, विशेष कर गुरु तेगबहादुर के बलिदानों को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजली देने हेतु गुरुद्वारों में जा कर मत्था टेकने और हिंद की चादर अभियान में भाग लेने का सुझाव दिया ताकि आपसी सद्भाव बढ़ सके. विनय पत्राले ने उपस्थित प्रबुद्ध नागरिकों से बंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूरे होने और सरकार द्वारा इस गीत को राष्ट्रीय गान से पूर्व सम्पूर्ण मूल रूप में गाने का प्रयास और कंठस्थ करने का निवेदन किया. गोष्ठी में उपस्थित सदस्यों ने भी अपने अपने परिचय दिए और विषय वस्तु पर अपने विचार व्यक्त किए.
संगोष्ठी में उपस्थित प्रमुखजनों में संघ से जुड़े विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रतिनिधि, वनवासी कल्याण केंद्र, विश्व हिन्दू परिषद, पूर्व सैनिक सेवा परिषद्, भारत भारती के सदस्यों सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे जिनमें चंद्रकांत रायपत, मदन सिंह, किशोर मंत्री, धन्नजय कुमार सिंह, अरुण कुमार बुधिया, सुरेश बोदरा, विजय मुंडा, नवीन कुमार, डॉ नंदकिशोर मिश्रा, ब्रिगेडियर बी जी पाठक, वेटरन अनिरुद्ध सिंह, वेटरन सुशील कुमार सिंह, वेटरन अवध मणि पाठक, वेटरन ए के श्रीवास्तव, वेटरन भोला प्रसाद, वेटरन राजू कुमार उपाध्याय, वेटरन प्रकाश साव, वेटरन उमेश कुमार सिंह, श्री मति प्रिया मुंडा, श्री मति नूतन झा आदि की उपस्थेथिति प्रमुख थी. सभा की समाप्ति जमशेदपुर से पधारे वेटरन सुशील कुमार सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुई.
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लेखक के बारे में
By Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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