तीन दारोगा निलंबित सीआइडी करेगी जांच

रांची: प्रीति के जिंदा होने और उसकी कथित हत्या के आरोप में तीन बेगुनाहों को जेल में रखने के मामले में डीजीपी राजीव कुमार ने मंगलवार को केस के अनुसंधानक दारोगा सुरेंद्र कुमार,चुटिया थाने के प्रभारी कृष्ण मुरारी और बुंडू थाने के तत्कालीन प्रभारी संजय कुमार को निलंबित कर दिया है. मामले की सीआइडी जांच […]
रांची: प्रीति के जिंदा होने और उसकी कथित हत्या के आरोप में तीन बेगुनाहों को जेल में रखने के मामले में डीजीपी राजीव कुमार ने मंगलवार को केस के अनुसंधानक दारोगा सुरेंद्र कुमार,चुटिया थाने के प्रभारी कृष्ण मुरारी और बुंडू थाने के तत्कालीन प्रभारी संजय कुमार को निलंबित कर दिया है.
मामले की सीआइडी जांच का आदेश दिया है. डीजीपी ने बताया : सीआइडी दो अलग-अलग मामलों की जांच करेगी. बुंडू थाना क्षेत्र से मिला शव किस महिला का था, इसका पता लगायेगी. साथ ही उस महिला के शव को प्रीति का शव कैसे और क्यों बताया गया, तीन निदरेष युवकों अजीत, अमरजीत और अभिमन्यु को किन-किन अफसरों ने फंसाया, इसकी भी जांच करेगी. डीजीपी ने कहा : तीन निदरेष को जेल भेजने में बुंडू के डीएसपी रामसरेख राय की भूमिका है या नहीं, इसकी भी जांच की जायेगी. डीजीपी ने बुंडू डीएसपी से स्पष्टीकरण भी मांगा है.
डीजीपी से मिले परिजन : बैठक के दौरान डीजीपी ने जेल में बंद अजीत, अमरजीत और अभिमन्यु के परिजनों से मुलाकात की. डीजीपी ने तीनों के परिजनों से कहा, चिंता मत कीजिए, आपके बच्चे जल्द ही जेल से बाहर आयेंगे. अजीत और अमरजीत के परिजनों ने पुलिस हिरासत में दोनों के साथ टॉर्चर किये जाने की शिकायत भी की.
बैठक में थे कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी : इससे पहले डीजीपी ने आइजी एमएस भाटिया, डीआइजी प्रवीण सिंह, एसएसपी प्रभात कुमार, और ग्रामीण एसपी सुरेंद्र कुमार झा के साथ बैठक की. बैठक में सीआइडी के एडीजी एसएन प्रधान सहित कई अधिकारी भी मौजूद थे. डीजीपी ने शाम 4.30 से सात बजे तक मामले से जुड़े हर पहलू की जानकारी ली. ग्रामीण एसपी की ओर से तैयार की गयी प्रारंभिक रिपोर्ट की समीक्षा की.
घटनाक्रम
14 फरवरी : प्रीति अपने दोस्त प्रदीप के साथ पलामू चली गयी
15 फरवरी : बुंडू इलाके में एनएच के किनारे से अज्ञात महिला का शव मिला
16 फरवरी : प्रीति के पिता सुरेश सिंह ने कथित रूप से शव की पहचान अपनी बेटी के रूप में किया. हालांकि अब वह इस बात से मुकर गये हैं
17 फरवरी : प्रीति की दोस्त पिंकी के बुलावे पर अजीत पेंटालून मॉल पहुंचा, जहां से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया. पर केस डायरी में गिरफ्तारी उसके घर से दिखाया
18 फरवरी : बुंडू पुलिस ने अजीत और अमरजीत को गिरफ्तार बताया. दोनों से जबरन स्वीकारोक्ति बयान दर्ज किया. इसमें प्रीति की गैंग रेप के बाद हत्या की कहानी गढ़ी.
26 फरवरी : डीएसपी रामसरेख राय ने सुपरविजन रिपोर्ट सौंपी
अप्रैल : पुलिस ने अजीत और अमरजीत के खिलाफ कोर्ट में चाजर्शीट दाखिल की
15 मई : पुलिस के दबाव में अभिमन्यू ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया
14 जून : कुछ लोगों ने प्रीति को रिम्स परिसर से पकड़ कर पुलिस को सौंपा
15 जून : प्रीति ने कहा कि वह खुद गयी थी. जेल भेजे गये तीनों सिर्फ दोस्त हैं
16 जून : डीआइजी व ग्रामीण ने प्रीति का बयान लिया
16 जून : प्रीति के पिता सुरेश सिंह बयान से मुकरे, कहा कि पुलिस ने जबरन दूसरे के शव को सौंप दिया
कौन-कौन सस्पेंड
सुरेंद्र कुमार, केस के अनुसंधानक
कृष्ण मुरारी, चुटिया थाना प्रभारी
संजय कुमार, बुंडू थाने के तत्कालीन प्रभारी
सीआइडी जांच का दायरा
बुंडू से मिला शव किस महिला का था
महिला के शव को प्रीति का शव क्यों और कैसे बताया गया
तीन निदरेष युवकों को किन-किन अफसरों ने फंसाया
पूरे मामले में बुंडू डीएसपी रामसरेख राय की भूमिका क्या थी
पुलिस की गलतियां
अज्ञात महिला के शव को प्रीति का बताया
प्रीति की हत्या के आरोप में अजीत को पेंटालून मॉल से पकड़ा, गिरफ्तारी दिखायी उसके घर से
प्रीति की चुनरी और जूती घर से थाने मंगवा कर
धुर्वा डैम से बरामदगी दिखायी गयी
गैंग रेप व हत्या का अपराध स्वीकार करने के लिए अजीत और अमरजीत को चुटिया व नामकुम थाने में रख कर टॉर्चर किया गया. दोनों अपनी बेगुनाही के साक्ष्य देते रहे, पर पुलिस ने नहीं सुनी
बुंडू डीएसपी से प्रताड़ना की शिकायत करने के बाद भी दोनों की चुटिया थानेदार ने पिटाई की
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