प्रीति कांड: पुलिस को पता था कि निर्दोष हैं अमरजीत, अजीत व अभिमन्यु फिर भी तीनों को फंसाया!

Updated at : 17 Jun 2014 8:23 AM (IST)
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प्रीति कांड: पुलिस को पता था कि निर्दोष हैं अमरजीत, अजीत व अभिमन्यु फिर भी तीनों को फंसाया!

प्रीति के जीवित होने और उसकी हत्या के आरोप में तीन युवकों को जेल में रखने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. पुलिस की कार्यशैली से ऐसा लगता है कि बुंडू से 15 फरवरी को मिले महिला के शव को प्रीति का बताने और उसकी हत्या के केस में तीनों युवकों को […]

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प्रीति के जीवित होने और उसकी हत्या के आरोप में तीन युवकों को जेल में रखने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. पुलिस की कार्यशैली से ऐसा लगता है कि बुंडू से 15 फरवरी को मिले महिला के शव को प्रीति का बताने और उसकी हत्या के केस में तीनों युवकों को फंसाने के लिए पुलिस ने हर काम किया.

रांची: पुलिस को पहले दिन से ही पता था कि बुंडू में 15 फरवरी को मिला महिला का शव प्रीति का नहीं था और उसकी हत्या में अजीत, अमरजीत और अभिमन्यु उर्फ मोनू शामिल नहीं हैं. अजीत और अमरजीत ने अपनी बेगुनाही के पर्याप्त साक्ष्य भी पुलिस को दिये थे, पर इसकी जांच नहीं की गयी. पुलिस ने बुंडू से मिले शव को प्रीति का बताया और प्रीति के साथ गैंग रेप की कहानी भी बना डाली. फिर कहानी को अजीत और अमरजीत का स्वीकारोक्ति बयान बताने के लिए दोनों को दो दिनों (17 व 18 फरवरी) तक चुटिया और नामकुम थाने में प्रताड़ित किया. यह काम चुटिया थाना प्रभारी कृष्ण मुरारी सहित अन्य पुलिस अफसरों ने किया. ये बातें तब सामने आयीं, जब अजीत और अमरजीत के परिजनों ने वरिष्ठ पुलिस अफसरों को साक्ष्य के साथ सारी बातें बतायी.

हर तरह से प्रताड़ित किया गया : परिजनों के अनुसार, अजीत और अमरजीत ने न्याय की उम्मीद में चुटिया थाने में एक डीएसपी और बुंडू के डीएसपी को अपनी प्रताड़ना की कहानी भी बतायी थी. पर इसके बाद भी दोनों को बूरी तरह पीटा गया. जलते हीटर पर दोनों से लघुशंका तक कराया गया. इसके बाद दोनों टूट गये और पुलिस की बात मान ली. अजीत और अभिमन्यु के परिजनों के अनुसार, उन्होंने पूर्व में गृह सचिव, डीजीपी, आइजी, डीआइजी, एसएसपी व ग्रामीण एसपी को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी. दोनों की बेगुनाही के सबूत भी दिये. पर सभी जगहों पर सिर्फ कागजी कार्रवाई हुई.

घर से मंगवायी चुनरी व जूती
पुलिस ने केस डायरी में कहा है कि अजीत और अमरजीत की निशानदेही पर धुर्वा डैम से प्रीति की जूती और चुनरी बरामद की गयी है. लेकिन यह सच नहीं है. पुलिस ने प्रीति के पिता को फोन कर घर से चुनरी और जूती चुटिया थाने में मंगवायी. प्रीति के पिता ने सोमवार को पुलिस के सीनियर अफसरों को यह बात बतायी.

पुलिस अफसरों की भूमिका की भी जांच शुरू : डीआइजी प्रवीण सिंह ने बताया : मामले में दो आदेश जारी किये गये हैं. बुंडू में 15 फरवरी को मिला शव किसका था, इसकी दोबारा जांच के लिए कोर्ट में आवेदन दिया जाये, जांच का सुपरविजन ग्रामीण एसपी खुद करें. तीन निदरेषों को फंसाने में शामिल पुलिस अफसरों की भूमिका की जांच ग्रामीण एसपी करें.

झूठ बोली पुलिस

पुलिस ने केस डायरी में जिक्र किया है कि अजीत को उसके घर से बुंडू पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पर यह सच नहीं है. अजीत को 17 फरवरी को पेंटालून मॉल से गिरफ्तार किया गया था. मॉल में लगे सीसीटीवी के फुटेज से भी यह स्पष्ट हो जायेगा कि कैसे पिंकी और अजीत मिलते हैं और इसके बाद पुलिस अजीत को पकड़ लेती है.

प्रीति के पिता ने बयान बदला, कहा पुलिस ने जबरन दे दिया शव

प्रीति के पिता ने सोमवार को डीआइजी प्रवीण सिंह और ग्रामीण एसपी एसके झा के सामने कहा कि वह बुंडू से मिले शव की पहचान अपनी बेटी के रूप में नहीं कर रहे थे. पुलिस ने शव को जबरन उनकी बेटी का बताया. पहचान के सात दिन बाद पुलिस ने उन्हें फोन करके रिम्स से शव लाने के लिए दबाव दिया.

युवकों के निर्दोष होने के साक्ष्य
प्रीति ने 14 फरवरी को दिन के करीब 2.30 बजे अजीत के मोबाइल पर एसएमएस किया. इसमें लिखा था, 15 फरवरी को मुझसे मिलो. पिता (सुरेश सिंह) ने बहुत पीटा है. कृष्णापुरी (चुटिया) रेलवे फाटक के पास दिन के 12.30 बजे आना. मां (प्रीति की सौतेली मां) ने 500 रुपये मांगा है. मना करने पर उसने भी पीटा है. अजीत के परिजनों के अनुसार, 14 फरवरी को दोनों के बीच इस मैसेज के अलावा कोई बात नहीं हुई. अजीत 15 को रेलवे फाटक के पास गया. वहां वह 12.30 से 1.30 बजे तक रुका रहा. पर प्रीति नहीं आयी. अजीत ने पकड़े जाने के बाद यह बात पुलिस को बतायी थी.

पुलिस की कहानी में 14 फरवरी को प्रीति, अजीत, अमरजीत और अभिमन्यु को धुर्वा डैम के पास बताया गया है. फिर सभी को विकास की कार से बुंडू जाने की बात कही गयी है. पुलिस की यह कहानी भी झूठी है. अजीत उस दिन शाम को अपने मामा के साथ मेन रोड में मोबाइल खरीद रहा था. मोबाइल दुकान के सीसीटीवी फुटेज में यह साफ दिखता है. पकड़े जाने के बाद अजीत ने यह जानकारी पुलिस को दी थी. पर पुलिस ने इसकी जांच नहीं की. अजीत के परिजनों ने सीसीटीवी फुटेज के बारे में सीनियर अफसरों को बताया था, पर न्याय नहीं मिला.

पुलिस की कहानी में जिस समय अजीत, अमरजीत, अभिमन्यु और विकास को शव लेकर बुंडू की तरफ जाते बताया गया है, उस समय अजीत और अमरजीत धुर्वा में ही एक रिसेप्शन पार्टी में थे. इसकी पुष्टि दोनों के मोबाइल लोकेशन से भी होता है. पार्टी में मौजूद लोग भी इसके गवाह हैं. पुलिस ने इस तथ्य की भी जांच जरूरी नहीं समझी.

चुटिया थाने में प्रीति की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज कराते समय उसके पिता ने उसकी हुलिया और शारीरिक बनावट की जानकारी दी थी. प्रीति दुबली-पतली है. उसकी उम्र 17 से 18 साल के बीच है. पर बुंडू में मिला शव मोटी महिला का था, जिसकी उम्र करीब 25 साल बतायी गयी है. प्रीति कुंवारी है, पर बुंडू में मिले शव के हाथ में कांच की चुड़ियां थी. पुलिस ने प्राथमिकी में भी बताया है कि मिला शव शादीशुदा का है.

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