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दिल्ली दंगे मामले में फैजान खान को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत, फर्जी आईडी पर सिम देने का था आरोप

Updated at : 23 Oct 2020 1:25 PM (IST)
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दिल्ली दंगे मामले में फैजान खान को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत, फर्जी आईडी पर सिम देने का था आरोप

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi highcourt) ने पूर्वोत्तर दिल्ली हिंसा (Delhi Riots) मामले में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के आरोपों के तहत गिरफ्तार किए गए एक फैजान खान को जमानत दे दी. उस पर एक अन्य आरोपी आसिफ इकबाल तनहा को कथित तौर पर फर्जी आईडी पर सिम कार्ड देने का आरोप था.

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्वोत्तर दिल्ली हिंसा मामले में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के आरोपों के तहत गिरफ्तार किए गए एक फैजान खान को जमानत दे दी. उस पर एक अन्य आरोपी आसिफ इकबाल तनहा को कथित तौर पर फर्जी आईडी पर सिम कार्ड देने का आरोप था.

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार जामिया मिलिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा के के बयान को प्रसारित करने के मामले में एक खबरिया चैनल को स्त्रोत बताने का एक और मौंका दिया है. मामले पर सुनवाई करते हुए जज ने कहा कि अभियुक्त के बयान को प्रसारित नहीं किया जा सकता है क्योंकि वह आम जनता के लिए नहीं है. साथ ही कोर्ट ने कह था कि पत्रकारों को केस डायरी निकालने और उसे प्रसारित करने का कोई अधिकार नहीं है.

वहीं गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि इस साल फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे राष्ट्रीय राजधानी में ”विभाजन के बाद सबसे भयानक सांप्रदायिक दंगे थे”. साथ ही अदालत ने टिप्पणी की कि यह ”प्रमुख वैश्विक शक्ति” बनने की आकांक्षा रखनेवाले राष्ट्र की अंतरात्मा में एक ”घाव” था. अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के तीन मामलों में जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए यह टिप्पणियां की. ताहिर हुसैन पर सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने के लिए कथित तौर पर अपने राजनीतिक दबदबे का दुरुपयोग करने का आरोप है.

अदालत ने कहा, ”यह सामान्य जानकारी है कि 24 फरवरी, 2020 के दिन उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई हिस्सें सांप्रदायिक उन्माद की चपेट में आ गये, जिसने विभाजन के दिनों में हुए नरसंहार की याद दिला दी. दंगे जल्द ही जंगल की आग की तरह राजधानी के नये भागों में फैल गये और अधिक से अधिक निर्दोष लोग इसकी चपेट में आ गये.” अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा, ”दिल्ली दंगे 2020 एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की आकांक्षा रखने वाले राष्ट्र की अंतरात्मा पर एक घाव है और दिल्ली में हुए ये दंगे ”विभाजन के बाद सबसे भयानक सांप्रदायिक दंगे थे.”

अदालत ने कहा कि इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर दंगे फैलाना ”पूर्व-नियोजित साजिश” के बिना संभव नहीं है. पहला मामला दयालपुर इलाके में हुए दंगों के दौरान हुसैन के घर की छत पर पेट्रोल बम के साथ 100 लोगों की कथित मौजूदगी और उन्हें दूसरे समुदाय से जुड़े लोगों पर बम फेंकने से जुड़ा है. दूसरा मामला क्षेत्र में एक दुकान में लूटपाट से जुड़ा है, जिसके कारण दुकान के मालिक को लगभग 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ. जबकि, तीसरा मामला एक दुकान में लूटपाट और जलाने से संबंधित है जिसमें दुकान के मालिक को 17 से 18 लाख रुपये का नुकसान हुआ.

Posted By: Pawan Singh

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