दिल्ली के नरेला इलाके में प्लास्टिक फैक्टरी में लगी आग, दो की मौत, कई झुलसे

प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 दमकल के प्रयासों के बावजूद आग पर लगभग दो घंटे के बाद भी काबू नहीं पाया गया, जिसकी वजह से इस अगलगी में कई लोग झुलस गये.
नयी दिल्ली के नरेला इंडस्ट्रियल एरिया में आज सुबह एक प्लास्टिक फैक्टरी में आग लग गयी जिसमें झुलसकर दो लोगों की मौत हो गयी. जानकारी के अनुसार इस आग में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है. आग की सूचना मिलते ही 15 दमकल घटना स्थल पर पहुंचे और आग बुझाने के काम में जुट गये.
DCP ने बताया कि फैक्टरी से 20 लोगों को निकाला गया है. इनमें से 18 सुरक्षित हैं, हालांकि वे घायल हैं. दो की मौत हो गयी है. आग एक ब्लास्ट के साथ हुई. आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 दमकल के प्रयासों के बावजूद आग पर लगभग दो घंटे के बाद भी काबू नहीं पाया गया, जिसकी वजह से इस अगलगी में कई लोग झुलस गये. आग लगने की घटना सुबह साढ़े नौ बजे के आसपास हुई. जलकर मरने की पहचान अभी तक नहीं हो पायी है. बताया जा रहा है कि मरने वालों की संख्या में वृद्धि हो सकती है.
Delhi | 20 people were rescued, out of which 18 are injured and 2 dead. According to the information received, the blast happened after switching on a Polyurethane machine kept inside the factory. Investigation underway: DK Mahla, DCP pic.twitter.com/nefeAjIvKW
— ANI (@ANI) November 1, 2022
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह प्लास्टिक फैक्टरी तीन मंजिला है और लगभग तीन सौ वर्ग मीटर में फैली हुई है. आग फैक्टरी के दूसरी मंजिल पर लगी और उसके बाद यह फैलकर तीसरी मंजिल तक पहुंच गयी. आग क्यों लगी इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पायी है. कारणों का पता लगाया जा रहा है.
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लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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