दिल्ली के नरेला इलाके में प्लास्टिक फैक्टरी में लगी आग, दो की मौत, कई झुलसे
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 01 Nov 2022 1:23 PM
प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 दमकल के प्रयासों के बावजूद आग पर लगभग दो घंटे के बाद भी काबू नहीं पाया गया, जिसकी वजह से इस अगलगी में कई लोग झुलस गये.
नयी दिल्ली के नरेला इंडस्ट्रियल एरिया में आज सुबह एक प्लास्टिक फैक्टरी में आग लग गयी जिसमें झुलसकर दो लोगों की मौत हो गयी. जानकारी के अनुसार इस आग में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है. आग की सूचना मिलते ही 15 दमकल घटना स्थल पर पहुंचे और आग बुझाने के काम में जुट गये.
DCP ने बताया कि फैक्टरी से 20 लोगों को निकाला गया है. इनमें से 18 सुरक्षित हैं, हालांकि वे घायल हैं. दो की मौत हो गयी है. आग एक ब्लास्ट के साथ हुई. आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 दमकल के प्रयासों के बावजूद आग पर लगभग दो घंटे के बाद भी काबू नहीं पाया गया, जिसकी वजह से इस अगलगी में कई लोग झुलस गये. आग लगने की घटना सुबह साढ़े नौ बजे के आसपास हुई. जलकर मरने की पहचान अभी तक नहीं हो पायी है. बताया जा रहा है कि मरने वालों की संख्या में वृद्धि हो सकती है.
Delhi | 20 people were rescued, out of which 18 are injured and 2 dead. According to the information received, the blast happened after switching on a Polyurethane machine kept inside the factory. Investigation underway: DK Mahla, DCP pic.twitter.com/nefeAjIvKW
— ANI (@ANI) November 1, 2022
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह प्लास्टिक फैक्टरी तीन मंजिला है और लगभग तीन सौ वर्ग मीटर में फैली हुई है. आग फैक्टरी के दूसरी मंजिल पर लगी और उसके बाद यह फैलकर तीसरी मंजिल तक पहुंच गयी. आग क्यों लगी इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पायी है. कारणों का पता लगाया जा रहा है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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