शिक्षामंत्री ने दी शिक्षकों को राहत, बिहार में अब वैधानिक दायित्व से परे नहीं लिया जायेगा शिक्षकों से काम

Published at :05 Mar 2021 7:58 AM (IST)
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शिक्षामंत्री ने दी शिक्षकों को राहत, बिहार में अब वैधानिक दायित्व से परे नहीं लिया जायेगा शिक्षकों से काम

शिक्षा मंत्री ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अब पढ़ाई का पैमाना पैकेज हो गया है. इसके चलते न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, बल्कि शिक्षकों का सम्मान भी घटा है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि लोग अपने बच्चों को अब शिक्षक नहीं बनाना चाहते.

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पटना. शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने विधान परिषद में गुरुवार को एलान किया कि शिक्षकों की हर समस्या का समाधान किया जायेगा. शिक्षकों से ऐसा कोई काम नहीं लिया जायेगा,जिसकी वैधानिकता नहीं हो. सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि शिक्षकों को कोई भी अधिकारी परेशान न करे. इस दौरान विधान परिषद ने सर्वसम्मति से शिक्षा के बजट को मंजूरी दे दी. इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहे.

शिक्षा मंत्री चौधरी ने यह बातें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संदर्भ में कहीं. उन्होंने साफ किया कि अगर हम शिक्षकों की हर समस्या का समाधान करेंगे, तो शिक्षकों से भी उम्मीद रखेंगे कि वे हर समाज के बच्चों को अपना बच्चा समझकर स्कूल में पढ़ायेंगे. इसका फीडबैक अभिभावकों की तरफ से आना चाहिए.

उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अब पढ़ाई का पैमाना पैकेज हो गया है. इसके चलते न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, बल्कि शिक्षकों का सम्मान भी घटा है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि लोग अपने बच्चों को अब शिक्षक नहीं बनाना चाहते.

पैकेज के चलन से समाज का शिक्षा में निवेश भी घटा है. इस प्रवृत्ति में बदलाव की जरूरत है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि केवल बिहार के ही नहीं, पूरे देश के उच्च शिक्षण संस्थाओं की रैंकिंग घटी है. इसके सुधार में शिक्षकों की अहम भूमिका होगी.

उन्होंने साफ किया कि शिक्षकों और विद्यार्थियों के आउट कम पर ध्यान दिया जायेगा. अगर स्कूलों में सीखना और सिखाना सही तरह से होने लगा, तो हमारा राज्य शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल होगा. उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शिक्षा बजट पर पक्ष और विपक्ष के 10 सदस्यों ने भाग लिया.

शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि प्रदेश के सभी प्रारंभिक स्कूलों में स्थानीय भाषा में पढ़ाने का निर्णय बेहद अहम है. यह एक तरह से गांधी और विख्यात साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु के सपनों को साकार करने जैसा है.

दरअसल यह दोनों महापुरुष चाहते थे कि आंचलिक भाषाओं का विकास हो. खासतौर पर रेणु की अांचलिक रचनाओं का जिक्र किया. कहा कि यह संयोग है कि उनके शताब्दी वर्ष में बिहार सरकार ने आंचलिक भाषाओं के विकास के लिए बड़ा कदम उठाया है.

Posted by Ashish Jha

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