ज्ञान भारतम मिशन के तहत वैशाली में 1,000 से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, संरक्षण अभियान तेज
Published by : Vivek Pandey Updated At : 12 Jun 2026 10:25 AM
Ai से ली गई तस्वीर
Hajipur News: ज्ञान भारतम मिशन के तहत वैशाली जिले में 1,000 से अधिक 75 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों की पहचान की गई है. जिला प्रशासन डिजिटलीकरण और संरक्षण के लिए विशेष अभियान चला रहा है, जिसकी अंतिम तिथि 15 जून 2026 है.
Hajipur News: (कैफ अहमद) वैशाली जिले में ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत 75 वर्ष अथवा उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों की पहचान, डिजिटलीकरण और संरक्षण के लिए वैशाली जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है. जिला प्रशासन की टीमों ने सभी प्रखंडों और नगर निकाय क्षेत्रों में सर्वेक्षण अभियान तेज कर दिया है. अब तक जिले में एक हजार से अधिक पांडुलिपियों की पहचान कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है.
260 से अधिक स्थलों का किया गया सर्वेक्षण
अभियान के दौरान प्रशासनिक टीमों ने 260 से अधिक स्थलों का भ्रमण कर पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया है. इन स्थलों में विभिन्न मठ, पुस्तकालय, पारंपरिक घराने, स्वतंत्रता सेनानियों के आवास तथा अन्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थान शामिल हैं.
दुर्लभ पांडुलिपियों से सामने आ रही समृद्ध विरासत
सर्वेक्षण के दौरान कई दुर्लभ और महत्वपूर्ण पांडुलिपियां भी मिली हैं, जो वैशाली की समृद्ध ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं. इन दस्तावेजों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है.

15 जून तक चलेगा विशेष अभियान
ज्ञान भारतम मिशन के तहत चल रहे इस विशेष अभियान की अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई है. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जिनके पास प्राचीन पांडुलिपियां उपलब्ध हैं, वे समय रहते इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें.
पांडुलिपियों का नहीं होगा अधिग्रहण
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान के दौरान किसी भी पांडुलिपि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा. केवल सत्यापन, फोटोग्राफी और डिजिटल दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जबकि मूल पांडुलिपियां उनके वर्तमान संरक्षकों के पास ही सुरक्षित रहेंगी.
जिलाधिकारी ने लोगों से किया सहयोग का आह्वान
जिलाधिकारी ने कहा कि ज्ञान भारतम मिशन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहरों के संरक्षण का महत्वपूर्ण अवसर है. उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि यदि उनके पास या उनकी जानकारी में 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी कोई पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ, धार्मिक, साहित्यिक, ऐतिहासिक या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध हो तो इसकी सूचना जिला प्रशासन या जिला कला, संस्कृति एवं युवा विभाग कार्यालय को दें.
मोबाइल और व्हाट्सएप से भी दे सकते हैं सूचना
इच्छुक व्यक्ति जिला प्रशासन से सीधे संपर्क करने के अलावा मोबाइल नंबर 90310 72054 पर कॉल या व्हाट्सएप संदेश भेजकर भी प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी साझा कर सकते हैं, ताकि उन्हें ज्ञान भारतम मिशन के तहत दस्तावेजीकृत किया जा सके.
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By Vivek Pandey
विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.
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