रोज जान जोखिम में डाल रहे राघोपुरवासी
Updated at : 07 Jul 2016 4:32 AM (IST)
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परेशानी . पीपा पुल खुलने से लोगों का नाव ही बनी एकमात्र सहारा दियारा क्षेत्र से गंगा के पार जाने व इस क्षेत्र में आने वालों के लिए नदी पार करने का एकमात्र सहारा नाव ही है. नाव से नदी पार करना जोखिम भरा होता है. इसे और जोखिम बनाने का कार्य नाविक कर रहे […]
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परेशानी . पीपा पुल खुलने से लोगों का नाव ही बनी एकमात्र सहारा
दियारा क्षेत्र से गंगा के पार जाने व इस क्षेत्र में आने वालों के लिए नदी पार करने का एकमात्र सहारा नाव ही है. नाव से नदी पार करना जोखिम भरा होता है. इसे और जोखिम बनाने का कार्य नाविक कर रहे हैं. क्षमता से अधिक भार लोड कर नदी पार कराना किसी भी सूरत में सुरक्षित नहीं है.
राघोपुर : मॉनसून की बारिश आरंभ हो चुकी है. गंगा नदी का जल स्तर दिनोदिन बढ़ रहा है. जल स्तर बढ़ने के कारण प्रखंड के रुस्तमपुर को कच्ची दरगाह से जोड़ने वाले पीपा पुल को खोल दिया गया है. दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए नदी पार करने का एकमात्र सहारा नाव है. उफनाती पदी को नाव से पार करना जोखिम भरा होता है. इसे और जोखिम बनाने का कार्य नाविक करते हैं. क्षमता से अधिक भार लोड कर नदी पार कराना किसी भी सूरत में सुरक्षित नहीं होता है. यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा से बेपरवाह इन नाविकों का ध्यान सिर्फ अधिक-से-अधिक पैसे कमाने पर रहता है.
रुस्तमपुर-कच्ची दरगाह पीपा पुल भी खोल दिया गया
ओवर लोडेड नाव से नदी पार करना जोखिम भरा काम
बैंक, डाक और कार्यालयों के कर्मी परेशान
बताते चलें कि बैंक, डाकघर, प्रखंड, अंचल, अस्पताल व स्कूल समेत
अनेक सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों के कर्मी रोजाना नदी पार कर आते-जाते हैं. वहीं प्रखंडवासी विभिन्न कार्यो को लेकर रोजाना जिला मुख्यालय व राजधानी समेत विभिन्न क्षेत्रों में जाते और लौटते हैं. इस
तरह विभिन्न घाटों से रोजाना हजारों लोग खतरे के साये में नाव से नदी पार करते हैं. वहीं नाविक बेफिक्र हो नाव का परिचालन करते हैं. मालूम हो कि जब नदी उफान पर होती है, तो खतरे की भयावहता लोगों की परेशानी को और ज्यादा बढ़ा देती है. प्रखंडवासियों, दैनिक कामगारों व व्यवसायियों समेत अनेक लोगों ने जिलाधिकारी से इस समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगायी है.
नहीं है आवागमन का दूसरा कोई विकल्प
नदी पार करने का कोई दूसरा विकल्प न होने से अपनी जान सांसत में डाल कर यात्रा करना लोगों की मजबूरी है. इस मजबूरी की फायदा नाविक उठाने से नहीं हिचकते. कच्ची दरगाह घाट हो या जेठुली घाट या फिर चेचर, चकौसन जिमदारी घाट. सभी जगह क्षमता से काफी अधिक भार लोड कर नाविक नाव पार करते हैं. किसी भी दिन इस तरह का नजारा इन घाटों को पार कर देखा जा सकता है. लोगों के जान-माल से खिलवाड़ कर रहे इन नाविकों पर कार्रवाई की बात तो दूर इस समस्या की तरफ ध्यान देना भी कोई प्रशासनिक पदाधिकारी मुनासिब नहीं समझते.
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