जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीण आंदोलन के मूड में

Updated at : 25 May 2016 12:08 AM (IST)
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जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीण आंदोलन के मूड में

महुआ नगर : महुआ में अधूरे सड़क निर्माण कार्य से विभागीय पदाधिकारी-कर्मियों तथा संवेदक की उदासीनता के कारण लोग काफी परेशान हैं. सरकार के आलाधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने अब लोगों को आंदोलन करने के लिए विवश कर दिया है. सड़क निर्माण के लिए लगभग तीन वर्षों से सड़क पर पत्थर बिछाकर छोड़े […]

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महुआ नगर : महुआ में अधूरे सड़क निर्माण कार्य से विभागीय पदाधिकारी-कर्मियों तथा संवेदक की उदासीनता के कारण लोग काफी परेशान हैं. सरकार के आलाधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने अब लोगों को आंदोलन करने के लिए विवश कर दिया है. सड़क निर्माण के लिए लगभग तीन वर्षों से सड़क पर पत्थर बिछाकर छोड़े जाने से जहां एक ओर रोड़े पर पिछल कर प्रतिदिन यात्री घायल हो रहे हैं.

लगातार सड़क दुर्घटनाओं में आने-जाने वाले लोग घायल हो रहे हैं. स्कूल-कॉलेज जाने-आने वाले छात्र-छात्राओं को रोना पड़ रहा है. संवेदक द्वारा बार-बार आश्वासन दिये जाने के बाद भी अब तक निर्माण कार्य अधूरा है. प्रखंड क्षेत्र के कुशहर से अब्दुलपुर होते हुए परसौनिया जाने वाली सड़क के मामले में डीएम का निर्देश भी अब तक बेअसर है.

मालूम हो कि सड़क पर पत्थर डाल कर इतने अरसे तक छोड़े जाने तथा अधूरे निर्माण कार्य की शिकायत स्थानीय ग्रामीण सुनील कुमार साह ने डीएम के जनता दरबार में की थी. डीएम ने संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को मामले की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया था. सड़क के अधूरे कार्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने कुशहर चौक पर एकदिवसीय धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित की थी.

जहां धरना स्थल पर पहुंचकर संवेदक ने उपस्थित लोगों को एक माह के अंदर सड़क निर्माण कार्य पूरा कराने का आश्वासन दिया था. उधर, डीएम के निर्देश पर संबंधित स्थानीय विभागीय पदाधिकारियों ने संवेदक को अविलंब सड़क निर्माण पूरा करने का निर्देश देते हुए अलकतरा हेतु लेटर भी निर्गत किया. लेकिन इन सभी प्रक्रियाओं के छह माह बाद भी कार्य पूरा नहीं किया गया. मालूम हो कि पत्थर बिछी सड़क के कारण जहां आसपास के ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं, विभिन्न कार्यों से कुशहर चौक अब्दुलपुर जाने वाले यात्रियों के लिए हमेशा खतरे की घंटी बजती रहती है.

विभागीय पदाधिकारियों के ऐसे उदासीन रवैये के कारण स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति काफी रोष व आक्रोश व्याप्त है. स्थानीय बुद्धिजीवी, समाजसेवियों के साथ-साथ आम लोगों का कहना है कि जनता द्वारा बार-बार आवाज उठाने के बाद भी किसी का इस ओर कोई ध्यान नहीं है. अब आक्रोशित ग्रामीण आंदोलन करने का मूड बना चुके हैं.

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