ट्रांसफर का समय देख राज्यकर्मियों की बढ़ी बेचैनी
Updated at : 25 May 2016 12:06 AM (IST)
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हाजीपुर : जैसे-जैसे मई माह की अंतिम तिथि नजदीक आ रही है, राज्यकर्मियों की बेचैनी बढ़ती जा रही है. विदित हो कि राज्यकर्मियों के स्थानांतरण और पदस्थापन के लिए सरकार ने केवल दो माह जनवरी और जून निर्धारित किया है. विगत कई साल से कभी संसदीय तो कभी विधान सभा चुनाव, तो कभी पंचायत और […]
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हाजीपुर : जैसे-जैसे मई माह की अंतिम तिथि नजदीक आ रही है, राज्यकर्मियों की बेचैनी बढ़ती जा रही है. विदित हो कि राज्यकर्मियों के स्थानांतरण और पदस्थापन के लिए सरकार ने केवल दो माह जनवरी और जून निर्धारित किया है. विगत कई साल से कभी संसदीय तो कभी विधान सभा चुनाव, तो कभी पंचायत और पैक्स चुनाव में कर्मियों के व्यस्त रहने के कारण जिले में कई साल से कर्मचारियों का स्थानांतरण एवं पदस्थापन लंबित है.
वर्षों से जमे हैं एक ही स्थान पर : जिले के दर्जनों राजयकर्मी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हैं. राज्यकर्मियों के एक ही जगह जमे रहने से न केवल उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है बल्कि वे कामकाज में अपनी दबंगता भी प्रदर्शित करने लगते है. इससे आम लोगों का कामकाज प्रभावित होता है.
एक ही जमे कर्मियों में समाहरणालय के विभिन्न प्रशाखाओं में पदस्थापित सहायकों के साथ-साथ जनसेवक, राजस्व कर्मचारी, पंचायत सेवक शामिल हैं. नियमानुसार राज्यकर्मियों का स्थानांतरण प्रत्येक तीन साल पर होना है यानी एक कर्मचारी अधिकतम तीन साल तक ही एक स्थान पर पदस्थापित रह सकता है. वहीं, इसके विपरीत समाहरणालय के विभिन्न प्रशाखाओं में तैनात सहायक अपने पूरे सेवाकाल में एक बार भी मुख्यालय से बाहर नहीं गये.
वहीं, ऐसे दर्जनों कर्मचारी हैं, जो सेवानिवृत्ति के कगार पर खड़े हैं, लेकिन एक बार भी मुख्यालय में पदस्थापित नहीं हो सके. सूत्रों का कहना है कि कुछ लोग आजीवन कई साल से संघ के पद धारक बन कर मुख्यालय में जमे हैं, लेकिन सरकारी परिपत्र के अनुसार कोई कर्मी इस शर्त पर केवल एक बार ही छूट पा सकता है कि वह संघ का पदधारक है.
क्या है चालाकी : मुख्यालय में जमे कर्मी अपनी विभिन्न प्रशाखाओं के पदस्थापन को अलग-अलग पदस्थापन बता कर एक ही जगह जमे हुए हैं जबकि नियमानुसार समाहरणालय, सदर अनुमंडल एवं सदर अंचल और प्रखंड कार्यालय में पदस्थापन मुख्यालय में पदस्थापन माना जाता है. जानकारों का कहना है कि इस तर्क के आधार पर यदि प्रशासन विश्लेषण करे, तो स्पष्ट हो जायेगा कि कितने लोग कभी मुख्यालय से बाहर नहीं गये हैं.
पांच साल पूर्व हुआ था स्थानांतरण : वर्ष 2011 में तत्कालीन जिला पदाधिकारी ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए वृहत पैमाने पर कर्मचारियों को स्थानांतरित करते हुए उनका पदस्थापन भी सुनिश्चित कराया था और तमाम पैरवी को किनारा करते हुए सभी स्थानांतरित कर्मियों को नये स्थान पर योगदान सुनिश्चित कराया था. उसके बाद प्रशासनिक जकड़न टूटी थी और जनता के काम के निष्पादन की दर बढ़ी थी.
क्यों छायी है बेचैनी
पंचायती चुनाव की व्यस्तता के बीच जिला पदाधिकारी ने कर्मचारियों के स्थानांतरण और पदस्थापन के लिए स्थापना समिति की बैठक बुलाने की घोषणा की है. सूत्रों ने बताया है कि डीएम ने संबंधित कर्मचारियों को आदेश दिया है कि स्थापना समिति की बैठक के पूर्व सभी संवर्गों के कर्मचारियों की सूची बना कर बैठक में पेश की जाये.
डीएम के सख्त रवैये से परिचित कर्मचारी इस बात को लेकर परेशान हैं कि यदि स्थानांतरण हो गया, तो किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगा. हालांकि ऐसे बेचैन कर्मचारी अभी से स्थानांतरण रुकवाने की जुगाड़ में लग गये हैं.
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