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अब 337 उपस्वास्थ्य केंद्रों से संबंधित रोगों की जानकारियां होंगी ऑनलाइन

Updated at : 18 Feb 2020 2:10 AM (IST)
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अब 337 उपस्वास्थ्य केंद्रों से संबंधित रोगों की जानकारियां होंगी ऑनलाइन

हाजीपुर : एकीकृत रोग सर्वेक्षण कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन सूचना तंत्र विकसित किया गया है. इसके लिए इंटिग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन पोर्टल स्थापित किया गया है. अब जिले के सभी 337 उप स्वास्थ्य केंद्रों से संबंधित बीमारियों की तमाम जानकारियां ऑनलाइन भेजी जायेंगी. इससे रोग के इलाज में तत्काल कदम उठाये जा सकेंगे. पोर्टल पर डाटा […]

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हाजीपुर : एकीकृत रोग सर्वेक्षण कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन सूचना तंत्र विकसित किया गया है. इसके लिए इंटिग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन पोर्टल स्थापित किया गया है. अब जिले के सभी 337 उप स्वास्थ्य केंद्रों से संबंधित बीमारियों की तमाम जानकारियां ऑनलाइन भेजी जायेंगी. इससे रोग के इलाज में तत्काल कदम उठाये जा सकेंगे.

पोर्टल पर डाटा अपलोड करने के लिए जिले की सभी एएनएम को ट्रेनिंग दी जायेगी. सदर अस्पताल परिसर स्थित जिला मानसिक स्वास्थ्य केंद्र के सभागार में सोमवार को आइएचआइपी का 11 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत हुई. इसमें प्रतिदिन के बैच में 30 से 32 नर्सें शामिल होंगी. इससे पहले प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, लैब टेक्नीशियन और फर्मासिस्टों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है.
आइडीएसपी के तत्वावधान मे आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन अपर मुख्यालय चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ज्ञान शंकर ने किया.मौके पर जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल पदाधिकारी डॉ सत्येंद्र प्रसाद सिंह, जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ एसके रावत, गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ आरके साहू समेत अन्य चिकित्सा अधिकारी उपस्थित थे.
जिला सर्वेक्षण इकाई के एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ माहेश्वरी प्रसाद महेश ने इंटिग्रेटेड बीमारियों के लक्षण और बचाव के बारे में जानकारी दी. कार्यक्रम का संचालन करते हुए डाटा मैनेजर कुमार अभिषेक ने पोर्टल पर अनमोल टैबलेट के माध्यम से डाटा अपलोड करने के बारे में एएनएम को विस्तार से जानकारी दी.
इन बीमारियों में होगी त्वरित कार्रवाई
इंटिग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन पोर्टल का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब सुदूर इलाकों में भी कई गंभीर रोगों से आक्रांत होने पर रियल टाइम मॉनीटरिंग होगी. इससे त्वरित निरोधात्मक कार्रवाई होगी और संबंधित रोगियों को उचित समय पर इलाज शुरू हो सकेगा.
एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ माहेश्वरी ने बताया कि अब बुखार, खांसी, दस्त, जॉन्डिस, एक्यूट फ्लेटसिड पेरालिसिस से संबंधित केसों की ऑनलाइन मॉनीटरिंग होगी. सभी केंद्रों से प्रतिदिन रिपोर्ट करना है.
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