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मोहल्ले में फैली गंदगी खोल रही नगर परिषद के दावों की पोल, ऐतिहासिक गांधी आश्रम के सामने कई दिनों से जमा है कूड़े का ढेर

Updated at : 01 Mar 2019 6:25 AM (IST)
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मोहल्ले में फैली गंदगी खोल रही नगर परिषद के दावों की पोल, ऐतिहासिक गांधी आश्रम के सामने कई दिनों से जमा है कूड़े का ढेर

हाजीपुर : हाजीपुर नगर के निवासी कूड़े कचरे के ढेर और जहां-तहां सड़कों पर बेतरतीब ढ़ंग से पसरी गंदगी के बीच जीवन बसर करने को विवश हैं. लगभग दो लाख की आबादी वाला यह शहर साफ-सफाई के मामले में अत्यंत खराब स्थिति में है. नगर परिषद ने सफाई कार्य का जिम्मा एनजीओ को सौंप रखा […]

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हाजीपुर : हाजीपुर नगर के निवासी कूड़े कचरे के ढेर और जहां-तहां सड़कों पर बेतरतीब ढ़ंग से पसरी गंदगी के बीच जीवन बसर करने को विवश हैं. लगभग दो लाख की आबादी वाला यह शहर साफ-सफाई के मामले में अत्यंत खराब स्थिति में है.
नगर परिषद ने सफाई कार्य का जिम्मा एनजीओ को सौंप रखा है. नगर परिषद में कुल 39 वार्ड हैं. शहर समेत इन 39 वार्डों की सफाई दो स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से करायी जाती है.
परिषद चाहे जो दावा करे, लेकिन नगर का एक भी वार्ड ऐसा नहीं जहां सफाई की स्थिति संतोषजनक हो. नगर के किसी भी मोहल्ले में जाइए, आपको कूड़े कचरे ही दिखायी पड़ेंगे. उधर नगर परिषद सफाई के नाम पर हर माह 16-17 लाख रुपये खर्च कर रहा है. इधर नगरवासी गंदगी के अंबार के बीच बदबू के मारे घूंट-घूंट कर जीने को बाध्य हैं.
दशकों पूर्व नगर परिषद् में सफाई कर्मियों की संख्या 150 से ज्यादा थी. यह तब की बात है जब नगर की आबादी 60 से 70 हजार के बीच थी. वार्डों की संख्या भी मात्र 18 थी. आज आबादी और वार्डों की तादाद, दोनों में दोगुनी से ज्यादा वृद्धि हुई है. इधर नगर परिषद् में सफाई कर्मियों की संख्या घट कर 71 रह गई है.
क्षेत्र और जनसंख्या विस्तार के लिहाज से वर्तमान में लगभग 500 सफाई कर्मियों की आवश्यकता बतायी जाती है, जबकि यहां कर्मियों की तादाद बढ़ाने की बात कौन कहे, पहले जितने कर्मी भी उपलब्ध नहीं रहे. सफाई कर्मियों की बहाली के बजाय नगर परिषद् ने अलग ही रास्ता अपनाया और साफ सफाई के काम के लिए स्वयंसेवी संस्था से करार कर लिया.
शहर की सड़कें, गली मोहल्ले और नाले बता रहे हैं कि एनजीओ के जरिए सफाई व्यवस्था नाकाम साबित हुई है. सफाई कर्मियों की कमी कब दूर की जाएगी, इस सवाल पर नगर परिषद् स्पष्ट कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है.नगर क्षेत्र के दर्जनों मुहल्लों की स्थिति ऐसी है कि आसपास की गंदगी के कारण मुहल्लेवासियों का सांस लेना दूभर है.
पोखरा मुहल्ला, नया टोला, जौहरी बाजार चौक से बागमली जाने वाली सड़क, नून गोला, महाजनटोली, मुफ्ती टोला, चौधरी मुबारकअली मुहल्ला, वैशाली महिला कॉलेज के निकट, सुभाष चौक से नवीन सिनेमा रोड समेत दो दर्जन से अधिक मुहल्लों से गुजरते हुए लोग नाक पर रूमाल रख कर तेज कदमों से निकलते हैं.
नगर का ऐतिहासिक गांधी आश्रम और इसके इर्द गिर्द के मोहल्ले तो गंदगी के पर्याय बन चुके हैं. जब इन मुहल्लों से गुजरने वाले राहगीरों को इतनी परेशानी होती है, तो यहां के वाशिन्दों को किन स्थितियों में रहना पड़ता है, यह आसानी से समझा जा सकता है. नारकीय स्थिति झेल रहे नगरवासियों का आक्रोश अपने वार्ड पार्षद पर फूटता है, तो वार्ड पार्षद संसाधनों की कमी और नगर परिषद की नाकामी को जिम्मेवार ठहराते हैं.
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