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सचिवालय के तालाब में दिखा साइबेरिया का अनोखा बत्‍तख, हजारों किमी सफर कर पहुंचे हैं पटना, देखें रोचक तस्वीरें

Updated at : 11 Oct 2023 5:34 PM (IST)
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सचिवालय के तालाब में दिखा साइबेरिया का अनोखा बत्‍तख, हजारों किमी सफर कर पहुंचे हैं पटना, देखें रोचक तस्वीरें

इस तालाब में अक्टूबर माह से ही पक्षियों का आना शुरू हो जाता है. जो मार्च-अप्रैल माह तक यहां रुकते हैं. इसके बाद इन पक्षियों का लौटना शुरू हो जाता है. एक समय बदहाल दिखने वाली इस तालाब को और सुंदर बना दिया गया है. जिससे यहां आने वाले पक्षियों की संख्या बढ़ गई है.

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पटना. बिहार सचिवालय स्थित राजधानी जलाशय में फेरोजीनस पोचार्ड का आगमन हुआ है. पिछले दो वर्षों से वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना पार्क प्रमंडल द्वारा इस पंक्षी को रिकार्ड किया जा रहा है. भूरे रंग का दिखने वाला यह पक्षी अकेले ही इस जलाशय में पहुंचा है.

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ऐसे पक्षी को फरोजीनस डक और सफेद आंख वाले पोचार्ड के नाम से भी जाना जाता है. ये मध्य आकार के गोताखोर बत्तख होते हैं. इसमें नर की आंख पीली और मादा की आंख गहरे रंग की होती है. ये मुख्य रूप से ताजे पानी के स्थान पर और तैरती वनस्पति वाले स्थान के किनारे रहना पसंद करते हैं. इनका प्रजनन क्षेत्र पश्चिमी मंगोलिया, साइबेरिया और अरब सागर हैं.

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ठंड के मौसम में ये भोजन की तलाश में दक्षिण पूर्व एशिया देशों में प्रवास करते हैं. ये पानी में डुबकी लगाकर भोजन करते हैं. मोलस्कस, जलीय कीड़े, छोटी मछलियां और जलीय पौधे खाते हैं. ये अक्सर रात के समय में ही भोजन करते हैं. इस प्रजाति को आइयूसीएन द्वारा खतरे की श्रेणी के निकट श्रेणी में रखा गया है.

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राजधानी जलाशय के क्षेत्र का सुरक्षित वातावरण, वैज्ञानिक प्रबंधन आदि का कार्य पटना पार्क प्रमंडल और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा किया जा रहा है. इसके कारण ही जलाशय अनगिनत प्रवासी पक्षियों से गुलजार हो रहा है.

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सचिवालय तालाब में प्रवासी पक्षियों के दीदार के लिए आम दर्शकों को रोक है. पक्षियों के दीदार से पहले पटना पार्क प्रमंडल के डीएफओ या इको पार्क के रेंज ऑफिसर से अनुमति लेनी होती है. पक्षियों के बारे में जानने की रुचि रखने वाले और शोधार्थियों को अनुमति दी जाती है.

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इस तालाब में अक्टूबर माह से ही पक्षियों का आना शुरू हो जाता है. जो मार्च-अप्रैल माह तक यहां रुकते हैं. इसके बाद इन पक्षियों का लौटना शुरू हो जाता है. एक समय बदहाल दिखने वाली इस तालाब को और सुंदर बना दिया गया है. जिससे यहां आने वाले पक्षियों की संख्या बढ़ गई है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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