सुपौल के मदरसे में मिठाई-समोसा खाने के बाद 4 छात्राएं बीमार, 10 साल की बच्ची की मौत, अब होगी जांच
सुपौल के एक निजी मदरसे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मिठाई-समोसा खाने के बाद चार छात्राएं बीमार पड़ गईं. दुर्भाग्यवश, एक 10 वर्षीय छात्रा की मौत हो गई. घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मदरसे की आवासीय व्यवस्था और भोजन की गुणवत्ता की गहन जांच शुरू कर दी है.
Supaul News: सुपौल के सोमवार को मां अपनी बेटी से मिलने मदरसे पहुंची थीं. जाते समय उन्होंने बच्ची के लिए मिठाई और समोसा दिया. शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही खाना कुछ घंटों बाद चार छात्राओं की तबीयत बिगड़ने और एक मासूम की मौत की वजह से जुड़े सवाल खड़े कर देगा. सुपौल के बसबिट्टी स्थित एक निजी मदरसे में ऐसा ही मामला सामने आया है.
मंगलवार को अचानक चार छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई. उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए सुपौल शहर के अलग-अलग अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान नेमुआ निवासी कमरे आलम की 10 वर्षीय बेटी अल्फिशा की मौत हो गई. घटना की जानकारी मिलते ही मदरसे में हड़कंप मच गया. पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी.
मामला सिर्फ छात्राओं के बीमार पड़ने तक सीमित नहीं है. अब प्रशासन यह भी खंगाल रहा है कि मदरसे में इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं को आवासीय सुविधा देने की अनुमति थी या नहीं और रहने-खाने से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं.
मिठाई-समोसा खाने के बाद बिगड़ी चार छात्राओं की तबीयत
सदर थाना क्षेत्र के बसबिट्टी वार्ड नंबर 19 में जामियअतुस सालिहात एजुकेशनल ट्रस्ट की ओर से निजी मदरसा संचालित किया जाता है. मदरसा प्रबंधन के अनुसार, यहां करीब 60 से 65 छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं. संस्था करीब दो वर्षों से संचालित है.
मदरसा संचालक खलील रहमान के अनुसार, सोमवार को अल्फिशा की मां अपनी बेटी से मिलने पहुंची थीं. उन्होंने बच्ची को मिठाई और समोसा दिया और वहां से चली गईं. इसके बाद इन चीजों को खाने वाली चार छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी.
बीमार होने वाली छात्राओं में आफिया, सहाना खातून, हलीमा सादिया और अल्फिशा शामिल थीं. हालत बिगड़ने पर सभी को इलाज के लिए ले जाया गया. इलाज के दौरान अल्फिशा ने दम तोड़ दिया. अन्य छात्राओं का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
दो साल से मदरसे में रह रही थी अल्फिशा
अल्फिशा की उम्र महज 10 साल थी. बताया गया है कि वह करीब डेढ़ से दो वर्षों से मदरसे के परिसर में रहकर पढ़ाई कर रही थी. परिवार के लिए बच्ची को खोना इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू है.
मिठाई और समोसा खाने के बाद एक साथ चार छात्राओं की तबीयत बिगड़ने से खाने की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे हैं. हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि छात्रा की मौत और अन्य छात्राओं की तबीयत खराब होने का कारण निश्चित रूप से वही खाना था.
पुलिस और प्रशासन ने भी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है. जांच पूरी होने और चिकित्सकीय जानकारी सामने आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा.
पुलिस ने मदरसे में पहुंचकर की पूछताछ
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मदरसे पहुंची. अधिकारियों ने परिसर का निरीक्षण किया और संचालक तथा वहां मौजूद शिक्षकों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. सदर एसडीपीओ ने भी मदरसा प्रबंधन से पूछताछ की.
पुलिस अब कई पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है. छात्राओं की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी, उन्होंने क्या खाया था, भोजन की गुणवत्ता कैसी थी और घटना से जुड़े दूसरे कारण क्या हो सकते हैं, इन सभी बिंदुओं की पड़ताल की जा रही है.
मृत छात्रा के परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है.
सिर्फ फूड प्वाइजनिंग नहीं, मदरसे की आवासीय व्यवस्था भी जांच के घेरे में
घटना के बाद प्रशासन ने मदरसे में छात्राओं के रहने की व्यवस्था को भी जांच के दायरे में लिया है. सदर एसडीएम मनोहर कुमार साह ने बताया कि सूचना मिलने के बाद वे एसडीपीओ और थाना प्रभारी के साथ मदरसे पहुंचे.
एसडीएम के अनुसार, मदरसे में बड़ी संख्या में छात्राएं आवासीय रूप से रह रही हैं. एक छात्रा की मौत हुई है, जबकि दो-तीन अन्य छात्राओं के विभिन्न अस्पतालों में इलाजरत होने की जानकारी मिली है. प्रशासन उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रहा है.
जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से डीपीओ सहित संबंधित पदाधिकारी मदरसे के दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं. यह देखा जा रहा है कि छात्राओं को आवासीय रूप से रखने की अनुमति संस्था को मिली है या नहीं. इसके साथ ही आवासीय संचालन से जुड़े निर्धारित नियमों और जरूरी व्यवस्थाओं का पालन किया जा रहा था या नहीं, इसकी भी जांच होगी.
डीएम के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने शुरू की पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम सावन कुमार के निर्देश पर जिला शिक्षा कार्यालय की टीम मदरसे पहुंची. टीम ने संस्था के संचालन से संबंधित जानकारी जुटाने के साथ छात्राओं के रहने की व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया.
अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों की भी जांच शुरू की है. प्रशासन यह जानने की कोशिश कर रहा है कि मदरसे में रहने वाली छात्राओं के लिए किस तरह की आवासीय व्यवस्था उपलब्ध है और संस्था किन नियमों के तहत संचालित हो रही है.
इसके साथ ही छात्राओं की अचानक तबीयत खराब होने के कारणों की भी पड़ताल की जा रही है.
शुरुआती जांच में फूड प्वाइजनिंग का संदेह, लेकिन मौत की असली वजह अभी साफ नहीं
सदर डीएसपी के अनुसार, शुरुआती तौर पर मामला फूड प्वाइजनिंग का प्रतीत हो रहा है. लेकिन एक छात्रा की मौत होने के बाद सिर्फ प्रारंभिक अनुमान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है.
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि छात्राओं की तबीयत बिगड़ने और अल्फिशा की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था. इस दौरान खाने से जुड़े पहलुओं के साथ अन्य संभावनाओं को भी जांच में शामिल किया जा रहा है.
Supaul News: डॉक्टरों की रिपोर्ट और जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
एसपी शरथ आरएस ने बताया कि पुलिस को बसबिट्टी स्थित मदरसे में पढ़ने वाली एक बच्ची की मौत की सूचना मिली थी. एक अन्य बच्ची के गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली, जबकि दो-तीन अन्य बच्चों के भी अस्पताल में भर्ती होने की सूचना है.
एसपी के मुताबिक, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. डॉक्टरों से बातचीत और जांच के बाद ही बच्चों की तबीयत बिगड़ने के वास्तविक कारणों की जानकारी सामने आएगी. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक ही खाने की चीज खाने के बाद चार छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई. साथ ही, 60 से 65 छात्राओं के आवासीय रूप से रहने वाले इस मदरसे में सुरक्षा, भोजन और रहने की व्यवस्था से जुड़े नियमों का कितना पालन हो रहा था. प्रशासनिक जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है.
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