सुपौल में हर घर तिरंगा अभियान के तहत बच्चों ने मधुबनी पेंटिंग से सजाया तिरंगे का संदेश

Updated:
विज्ञापन

पेंटिंग के साथ बच्चे | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

सुपौल में स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर 'हर घर तिरंगा अभियान' के तहत एक विशेष चित्रकला कार्यशाला का आयोजन किया गया. बच्चों ने मधुबनी (मिथिला) पेंटिंग शैली का प्रयोग करते हुए देशभक्ति का अनूठा संदेश दिया, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशप्रेम झलका.

विज्ञापन

Supaul News: स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत सुपौल में आयोजित एक विशेष चित्रकला कार्यशाला में बच्चों ने मधुबनी (मिथिला) पेंटिंग के माध्यम से देशभक्ति का अनूठा संदेश दिया. आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र, सुपौल द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में स्थानीय बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और तिरंगे की थीम पर आधारित आकर्षक चित्र बनाकर राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर संगम प्रस्तुत किया.

विज्ञापन

कार्यशाला में सबसे अधिक आकर्षण मधुबनी पेंटिंग शैली में बनाए गए तिरंगा चित्रों ने बटोरा, जिनमें बच्चों ने पारंपरिक लोककला और आधुनिक राष्ट्रभक्ति को एक साथ उकेरा.

तिरंगे के रंगों से सजा कैनवास

रविवार को आयोजित इस विशेष कार्यशाला में बच्चों ने कैनवास और कागज पर तिरंगे के तीन रंगों को विभिन्न कलात्मक रूपों में प्रस्तुत किया.

कई बच्चों ने राष्ट्रीय ध्वज, भारत माता, स्वतंत्रता सेनानियों और एकता-अखंडता के प्रतीकों को अपनी कल्पनाशक्ति के अनुसार चित्रित किया.

रंगों के माध्यम से उन्होंने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के संदेश को रचनात्मक तरीके से अभिव्यक्त किया.

मधुबनी पेंटिंग बनी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम में मधुबनी यानी मिथिला पेंटिंग शैली विशेष आकर्षण का केंद्र रही.

बच्चों ने पारंपरिक लोककला की बारीक रेखाओं, प्राकृतिक आकृतियों और प्रतीकात्मक शैली का उपयोग करते हुए तिरंगे पर आधारित चित्र बनाए.

इन कलाकृतियों में मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और भारतीय राष्ट्रभावना का सुंदर समन्वय देखने को मिला.

हर घर तिरंगा और राष्ट्रीय एकता का संदेश

बच्चों की पेंटिंग में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान, देशप्रेम, राष्ट्रीय स्वाभिमान और एकता-अखंडता का स्पष्ट संदेश दिखाई दिया.

कई चित्रों में हर घर पर तिरंगा फहराने, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सौहार्द जैसे विषयों को भी कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया.

आयोजकों के अनुसार बच्चों ने रंगों और प्रतीकों के माध्यम से यह संदेश दिया कि राष्ट्रध्वज केवल एक झंडा नहीं, बल्कि देश की अस्मिता और गौरव का प्रतीक है.

कला और देशभक्ति को लेकर बच्चों में दिखा उत्साह

पूरे कार्यक्रम के दौरान बच्चों में कला और देशभक्ति दोनों को लेकर विशेष उत्साह देखा गया.

उन्होंने पूरी एकाग्रता और मनोयोग से अपनी कल्पनाओं को रंगों के माध्यम से चित्रों में उतारा.

कार्यशाला में शामिल कई बच्चों ने कहा कि उन्हें पहली बार मधुबनी शैली में तिरंगा विषय पर चित्र बनाने का अवसर मिला.

Supaul News: नई पीढ़ी को विरासत और राष्ट्रध्वज से जोड़ने की पहल

आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई पीढ़ी को राष्ट्रीय ध्वज के महत्व से परिचित कराना और उन्हें मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक एवं कलात्मक परंपरा से जोड़ना है.

उनका कहना है कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में रचनात्मकता, सांस्कृतिक पहचान और देशप्रेम की भावना को एक साथ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

Also Read: RJD की 20 साल की सियासी कहानी: 2005 की हार से 2020 की वापसी और 2025 के झटके तक, कहां चूकी पार्टी?

Also Read: बिहार में सीनियर ऑफिसर-मिनिस्टर करेंगे छात्रों से बात, पढ़ाई होगी स्मार्ट, CM सम्राट के 4 घोषणाओं से बदलेगा एजुकेशन सिस्टम


आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन