सुपौल. आध्यात्मिक सत्संग समिति सुपौल के तत्वावधान में जिला मुख्यालय के श्रीराधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी में आयोजित चार दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन सीता-राम विवाह कथा का आयोजन किया गया. कथा के दौरान यजमान के रूप में रेखा देवी थी. समिति के सदस्य नलिन जायसवाल, सियावर शर्मा, चंदन जायसवाल ने सामूहिक रूप से व्यासपीठ पूजन किया. श्रीश्री 108 पूज्य चरण बालव्यास जी महाराज के शिष्य मानस भास्कर पंडित विद्यासागर महाराज ने धनुष यज्ञ की चर्चा करते हुए बताया कि त्रेता युग में एक धनुष जनकपुर में तोड़ने के लिए महाराज जनक के यहां भीड़ जुटा था. वह धनुष नहीं टूटा. जनक जी के आंखों से आंसू बहने लगी. जनक जी को कहना पड़ा कि आज धरती वीरों से विहीन है. लेकिन उस समय गुरु विश्वामित्र ने श्रीराम को आदेश दिया उठहु राम भन्जहु भव चापा. धनुष तोड़कर श्रीराम ने जनक जी की चिंता को दूर किया. कहा कि आज कलयुग में हर घर में दहेज रुपी धनुष पड़ा है. जिस कारण से हर घर की बेटी बोझ बन गई है. लेकिन आज भारत की बेटी हमारे समाज व परिवार की धरोहर है. इसलिए मातृ शक्ति के द्वारा ही संतान धर्म की जागृति हो सकती है. हमें अपने मातृभूमि और मातृ शक्ति को समझना जरूरी है. कार्यक्रम में श्याम परिवार के अध्यक्ष दामोदर अग्रवाल, राम कुमार चौधरी, राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी के सचिव रमेश मिश्रा, अशोक शर्मा, अभिषेक गुप्ता, हीरालाल कामत, देव नारायण चौधरी, संजीव कुमार सिंह बबलू, सुनील कुमार मंडल, देवी प्रसाद सिन्हा, योगेन्द्र साह, नत्थू चौधरी, सुनैना देवी, आशा देवी, अनीता देवी, पूनम जायसवाल, रंभा सिन्हा, रेणु देवी, लक्ष्मी कुमारी, अनिरुद्ध, सोनू कुमार साह सहित सैकड़ों भक्तजन उपस्थित रहे.
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