ePaper

जो मिटा दे जीवन की व्यथा वही है कथा : संत गोविंद जी महाराज

Updated at : 29 Mar 2025 6:53 PM (IST)
विज्ञापन
जो मिटा दे जीवन की व्यथा वही है कथा : संत गोविंद जी महाराज

महिलाओं को हनुमान जी की पूजा उन्हें स्पर्श कर नहीं करनी चाहिए. क्योंकि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे

विज्ञापन

प्रतापगंज. डाक बंगला परिसर में आयोजित वृहद नौ दिवसीय राम कथा और दुर्लभ सत्संग आयोजन में श्रोताओं की भीड़ उमड़ने लगी है. ऋषिकेश से पधारे ब्रह्मचारी संत गोविंद जी महाराज की मधुर वाणी और सुमुधर भजन व राम जीवन पर झांकियां की आकर्षक प्रस्तुति से श्रोता भाव विभोर हो रहे हैं. संत गोविंद जी महाराज ने कहा कि जो मिटा दे जीवन की व्यथा वही कथा है. कथा के चौथे दिन संत ने राम विवाह के प्रसंग के साथ महादेव की विकट महिमा की कथा का वर्णन किया. कहा कि पर्वतों में एक श्रेष्ठ पर्वत कैलाश है. जहां भगवान महादेव और पार्वती का निवास है. बताया कि महादेव की महिमा तीनों लोकों में लोकप्रिय है. वह भगवान राम के प्यारे थे. वह हमेशा राम राम की रट लगाते थे. एक दिन पार्वती ने महादेव से कहा आप हर समय राम राम करते हैं. महादेव ने बताया कि राम राजा के पुत्र हैं. वे मर्यादा पुरुषोत्तम से जाने जाते हैं. पार्वती ने कहा वे जब राजा के पुत्र हैं तो फिर ब्रह्म कैसे हैं. आप मुझे बताये ताकि मेरा भ्रम दूर हो जाय. आप मुझे राम जन्म, सीता विवाह राम वन कैसे गये वह कथा सुनायें. महादेव ने कहा कि पार्वती आपका प्रसंग बहुत अच्छा है. लेकिन आपकी एक बात पसंद नहीं आई जो राम पर शंका करती है. बावजूद महादेव ने पार्वती से राम की पूरी कथा सुनाया. संत ने कहा कि भगवान कितनी सुन्दर प्रकृति बनाई है. पूरे संसार में एक शक्ल के दो चेहरे नहीं मिलते. कहीं न कहीं एक सा दिखने वाले चेहरे में कोई न कोई अंतर अवश्य मिल जायेगा. भगवान ने किसी को गोरा तो किसी को काला, कोई नाटा तो कोई लंबा बनाया है. जिस भगवान के पास इतने सांचे हों तो आप सोच सकते हो कि भगवान खुद कितने सुंदर होंगे. उन्होंने प्रसंगवश बताया कि भगवान राम को पांच कारणों से धरती पर अवतरित होना पड़ा. भगवान को जब भी लीला करनी होती है तो वह संतो के हृदय में बस जाते हैं. वे उन्हीं के वेश में संसार की लीला देखने धरती पर विचरण करने आते हैं. उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि भजन की कोई सीमा नहीं होती है. भक्तों को भगवान कभी भी मिल जाते हैं. संत ने प्रवचन के क्रम में कहा कि शालीग्राम की पूजा तब होती है जब तुलसी उन पर जल चढ़ाती है. शालीग्राम की पूजा महिला नहीं करती है. कहा कि महिलाओं को हनुमान जी की पूजा उन्हें स्पर्श कर नहीं करनी चाहिए. क्योंकि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
RAJEEV KUMAR JHA

लेखक के बारे में

By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन