सड़क हादसे में मुआवजा नहीं मिला तो ध्यान दें! 12 सितंबर को सुपौल में 85 मामलों का होगा समाधान
बैठक में उपस्थित न्यायिक पदाधिकारी. | Prabhat Khabar Network
सुपौल जिले में सड़क दुर्घटना से जुड़े 85 लंबित मामलों के समाधान के लिए 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है. यह पहल पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने और कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से की गई है.
सुपौल जिले में मोटर दुर्घटना से जुड़े लंबित मामलों के निपटारे को लेकर बड़ी पहल शुरू की गयी है. आगामी 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण यानी एमएसीटी से संबंधित 85 मामलों का निस्तारण कराने की तैयारी है. गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के स्तर पर हुई महत्वपूर्ण बैठक में इन मामलों को चिह्नित करते हुए पक्षकारों के बीच आपसी सहमति और सुलह के आधार पर विवाद खत्म कराने की रणनीति तैयार की गयी. ऐसे में दुर्घटना मामलों से जुड़े पक्षकारों के लिए यह लोक अदालत राहत का महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है.
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85 मामलों पर टिकी नजर, समझौते से खत्म होगा विवाद
गुरुवार को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय सह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राकेश कुमार तृतीय की अध्यक्षता में उनके वेश्म में बैठक हुई. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सुपौल के प्रभारी सचिव मो अफजल आलम की पहल पर आयोजित इस बैठक में एमएसीटी मामलों के त्वरित निष्पादन पर विस्तार से चर्चा की गयी.
राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारण के लिए कुल 85 मोटर दुर्घटना दावा मामलों को चिह्नित किया गया है. इन मामलों में संबंधित पक्षकारों के बीच समझौते और सुलह की संभावनाएं तलाशकर विवाद का शीघ्र समाधान कराने पर जोर दिया गया.
सालों की कानूनी प्रक्रिया से मिल सकती है राहत
मोटर दुर्घटना से जुड़े मामलों में पीड़ित परिवारों को मुआवजे के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. ऐसे में लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से मामला सुलझने पर पक्षकारों को समय और संसाधन दोनों की बचत हो सकती है.
बैठक में लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर आवश्यक कार्रवाई करने और अधिक से अधिक मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया. संबंधित पक्षकारों को समझौते के लिए प्रेरित करने की दिशा में भी रणनीति बनायी गयी.
अधिवक्ताओं की भूमिका भी होगी अहम
राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए अधिवक्ताओं और पक्षकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा हुई. संबंधित लोगों को आपसी सहमति से विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा.
प्रभारी सचिव मो अफजल आलम ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आम लोगों को त्वरित, सरल और नि:शुल्क न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है. पक्षकारों की सहमति से मामलों का समाधान होने से न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाला समय और संसाधन बचते हैं. साथ ही अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है.
12 सितंबर को मिलेगा मामलों के निस्तारण का मौका
आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर सुपौल में तैयारियां तेज कर दी गयी हैं. एमएसीटी के 85 चिह्नित मामलों को अधिक से अधिक संख्या में निस्तारित कराने के लिए संबंधित पक्षकारों और अधिवक्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
बैठक में विधिज्ञ संघ अध्यक्ष नागेंद्र नारायण ठाकुर, सचिव सुधीर कुमार झा, शीलभद्र कुमार सिंह, पियूष परिजात, राजेश कुमार सिंह और शक्ति कुमारी सारिका भी मौजूद रहे.
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