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बच्ची को गोद में लेकर चलती मालगाड़ी के आगे कूदकर मां ने दी जान, बच्ची बची

Updated at : 17 Aug 2024 9:22 PM (IST)
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जख्मी बच्ची का अस्पताल में चल रहा है इलाज

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– जख्मी बच्ची का अस्पताल में चल रहा है इलाज

सुपौल. जिला मुख्यालय के लोहिया नगर चौक रेलवे ढाला के समीप शनिवार की दोपहर सहरसा-फारबिसगंज रेलखंड पर 25 वर्षीया महिला अपनी एक साल की बेटी को लेकर ट्रेन के आगे कूदकर आत्म हत्या कर ली. जबकि बच्ची बाल-बाल बच गयी. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि चलती मालगाड़ी के आगे कूद कर महिला ने आत्महत्या कर ली. उसके गोद में करीब एक साल की एक बच्ची भी थी, जो बाहर फेंका गयी. जिसे काफी चोटें आयी. जिसका इलाज एक निजी क्लिनिक में चल रहा है, जो खतरे से बाहर है. घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गयी. लोगों का कहना था कि उसे मरना ही था तो, कम से कम बच्ची को छोड़ देती. ऊपर वाले की कृपा थी कि बच्ची बच गयी. मृतक महिला की पहचान पिपरा थाना क्षेत्र के जोल्हनियां निवासी जमुनी खातून के रूप में की गयी. घटना की सूचना पर पहुंची मृतका की मां जोल्हनियां निवासी सबरून खातून ने बताया कि उनकी पुत्री जमुनी की शादी राघोपुर थाना क्षेत्र के सतकोदरिया निवासी मो खुर्शीद के साथ हुई थी. बेटी ससुराल में रह रही थी. उन्हें नहीं पता है कि उसकी बेटी ने इतना खौफनाक कदम किस परिस्थिति में उठाया है. जमुनी के ससुराल पक्ष के लोगों को भी जानकादी दी गयी है. सहरसा के जीआरपी की टीम शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु सदर अस्पताल भेज दिया. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया.

एक घंटे तक लगा रहा जाम

घटना के बाद लोहियानगर ढाला के पूर्वी भाग में जिला अतिथि गृह एवं पश्चिमी भाग में अंबेडकर चौक तक जाम लगा रहा. दोपहर की तेज धूप की वजह से जाम में फंसे लोग काफी परेशान नजर आ रहे थे. जाम इतना भयानक था कि लोग जहां फंसे थे वहां से हिल नहीं सकते थे. इसी बीच लोगों की नजर एक चौदह पहिया लोडेड ट्रक पर पड़ी. इसके बाद लोगों को पता चला की जाम का असली वजह यह ट्रक है. जाम में फंसे लोग वहां ट्रैफिक व्यवस्था की कमान संभाल रहे दो होमगार्ड के जवान के पास पहुंच कर ट्रक को जल्दी से निकालने का दबाव बनाने लगे. लोग गर्मी व जाम की वजह से इतना तंग आ गये थे कि अपने गुस्से का इजहार होमगार्ड पर ही करने लगे. वहीं होमगार्ड जवान भी काफी परेशान नजर आ रहे थे. इसके बाद होमगार्ड के जवान ने बताया कि बाबू हमारा कोई कसूर नहीं है. हमने ट्रक को बस पड़ाव के पीछे ही रोक दिया था. चालक को काफी डांटा भी था. चालक से कहा था कि नो इंट्री में तुमने वाहन क्यों प्रवेश कर दिया. इसी बीच प्रभारी सर का फोन पर आदेश आया कि ट्रक को जाने दो. बताईए साहब जब प्रभारी सर का आदेश हो जाय तो हमारे बूते की बात नहीं है कि ट्रक को रोक दें. यह सुन लोग शांत हुए व ट्रक को जाम से निकालने में जुट गये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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