– फिलहाल 62.16 एकड़ जमीन सिविल विमानन निदेशालय को किया गया हस्तांतरित – 1960 में हुआ वीरपुर हवाई अड्डे का हुआ था निर्माण – तीन जनवरी 1975 को एक साथ 18 विमानों का किया गया लैंडिंग – 1969 में इस हवाई अड्डे पर भारतीय वायु सेना के लड़ाकू डकोटा विमान की हुई थी इमरजेंसी लैंडिंग – वर्तमान में वीरपुर हवाई अड्डा का रनवे है 1200 मीटर लंबा – रनवे लंबा हो जाने के बाद 20 सीट का विमान उड़ने के लिए हो जायेगा उपयुक्त सुपौल. बाधा विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप धाम पानी पत्थर… रामधारी सिंह दिनकर की यह कविता सुपौल पर सटीक बैठ रही है. अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे सुपौल जिले का वीरपुर अनुमंडल मुख्यालय स्थित हवाई अड्डा जहां भारतीय वायु सेना के लड़ाकू डकोटा विमान का इमरजेंसी लैंडिंग किया गया था. वहां से अब जल्द ही हवाई सेवा शुरू होने की उम्मीद जतायी जा रही है. मंगलवार को बिहार सरकार के कैबिनेट में वीरपुर हवाई अड्डे का निर्माण के लिए जमीन मुआवजा मद में 42.37 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी गयी है. उक्त राशि से लगभग 88 एकड़ जमीन अधिग्रहण किया जायेगा. इस घोषणा के बाद स्थानीय लोगों के हवाई सफर का सपना पूरा होता हुआ दिख रहा है. जिससे लोगों में हर्ष का माहौल देखा जा रहा है. हवाई अड्डा को 62.16 एकड़ है जमीन सामरिक दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण माने जाने वाला इस हवाई अड्डा को 62.16 एकड़ जमीन है. कोसी परियोजना के मुख्य अभियंता ने हवाई अड्डे की 62.16 एकड़ जमीन सिविल विमानन निदेशालय को कुछ वर्ष पूर्व हस्तांतरित कर दिया. हस्तांतरित किए गए जमीन में 8.06 एकड़ जमीन कोसी योजना, जल संसाधन विभाग की और 54.10 एकड़ जमीन भारत सरकार, हवाई जहाज उतारने का स्थान है. जमीन स्थानांतरण किए जाने के बाद हवाई अड्डे परिसर में पीडब्लूड़ी द्वारा लाउंज का निर्माण कराया गया है. इतना ही नहीं 22 करोड़ की लागत से रनवे का चौड़ीकरण किया गया है. तीन किमी लंबा होगा रनवे जानकारी के अनुसार हवाई अड्डा को फिलहाल 62.16 एकड़ जमीन उपलब्ध है. 88 एकड़ जमीन अधिग्रहण हो जाने के बाद हवाई अड्डा को 150.16 एकड़ जमीन हो जायेगी. इसके बाद हवाई अड्डा के रनवे की लंबाई तीन किमी हो जायेगा. जहां बड़े विमान की लैंडिंग कराने में कोई परेशानी नहीं होगी.
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