सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में सच्चे मन से आने वाले भक्तों की मुरादें होती है पूरी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 Oct 2024 8:42 PM
रविवार की सुबह बैंड बाजे और आतिशबाजी के बीच भव्य रूप से विसर्जन जुलूस निकालकर प्रतिमा विसर्जित किया जाता जायेगा
प्रतापगंज. प्रखंड मुख्यालय प्रतापगंज बाजार स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर की महिमा निराली है. ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां के दरबार में आते हैं कभी खाली हाथ नहीं लौटे हैं. वैसे तो प्रत्येक दिन यहां मा की पूजा होती है. लेकिन दशहरा के मौके पर आसपास सहित पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लोग पूजा अर्चना करने आते हैं. स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि हरावत राज के जमींदार गणपत सिंह व नरपत सिंह के द्वारा 1950 ई से पूर्व मंदिर का निर्माण कराया गया था. पूर्व में इस मंदिर का देखरेख स्टेट के सिपह सलाहकार स्व सूर्य नारायण मल्लिक के द्वारा किया जाता था. बताया जाता है की स्थापना के समय मंदिर फूस का बना हुआ था. फिर बांस व टीन के बाद स्व किशोर महतो द्वारा पक्का का मंदिर निर्माण कराया गया. स्थानीय सेवानिवृत शिक्षक विजेंद्र लाल दास ने बताया कि ग्राउंड फ्लोर तथा फर्स्ट फ्लोर बनकर तैयार हो गया है. केवल बाहरी सजावट कुछ बाकी है जो प्रगति पर है. इस बार 2024 की मूर्ति दाता भवानीपुर दक्षिण पंचायत के वार्ड नंबर 15 निवासी दिनेश प्रसाद दास हैं. मंदिर के पुजारी प्रमोद झा विधि विधान से मां की पूजा अर्चना करते आ रहे हैं. मूर्ति कलाकार बंगाल के बासुपाल चितरंजन एवं पंडाल निर्माण कुशल कारीगरों द्वारा किया गया है. मंदिर के अंदर तथा परिसर के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है. संध्या आरती, भजन, कीर्तन के अलावा मैया जागरण प्रथम पूजा से ही हो रहा है. प्रथम पूजा से ही महाप्रसाद, संध्या में आरती के बाद वितरण हो रहा है. पूजा समिति के अध्यक्ष यदुनंदन लहोटिया ने बताया कि इस वर्ष भी दुर्गापूजा का आयोजन मंदिर परिसर में धूमधाम से पूजा पाठ किया जा रहा है. मेला में रोशनी, पानी, बिजली, शौचालय की व्यवस्था है. शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कमेटी की सदस्य तथा भोलेंटियर के रूप में युवा का भरपूर सहयोग है. प्रशासन की ओर से पदाधिकारी के साथ-साथ पुलिस के जवान जगह-जगह तैनात रहते हैं. प्रखंड विकास पदाधिकारी अमरेश कुमार, अंचलाधिकारी आशू कुमार, बीपीआरओ शिल्पा कुमारी तथा थाना अध्यक्ष प्रमोद झा सशस्त्र बल के साथ मंदिर परिसर का जायजा लेते रहते हैं. दशमी की संध्या यहां रावण दहन का कार्यक्रम रखा गया है. रविवार की सुबह बैंड बाजे और आतिशबाजी के बीच भव्य रूप से विसर्जन जुलूस निकालकर प्रतिमा विसर्जित किया जाता जायेगा.
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