पटना के गांधी मैदान में दलित समागम रैली 28 को

Published at :19 Feb 2025 6:47 PM (IST)
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पटना के गांधी मैदान में दलित समागम रैली 28 को

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ईं नंदलाल मांझी ने बुधवार को किसान भवन में पत्रकारों से बातचीत कर विस्तृत जानकारी दी

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सुपौल. आगामी 28 फरवरी को हम पार्टी द्वारा पटना के गांधी मैदान में दलित समागम रैली का आयोजन किया जायेगा. हम पार्टी के संस्थापक जीतन राम मांझी और अध्यक्ष डॉ संतोष मांझी द्वारा माता सबरी समान योजना के तहत 2000 रुपये प्रति माह, बालिकाओं के लिए नि:शुल्क शिक्षा, शिक्षा सेवक, रसोइया, आशा दीदी, ममता दीदी, टोला सेवक, विकास मित्र का पूर्ण समायोजन, 200 यूनिट तक नि:शुल्क बिजली, 5000 रुपये प्रति माह बेरोजगारी भत्ता, श्रमवीर पर्वत पुरुष बाबा दशरथ मांझी व प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह को भारतरत्न से सम्मानित करने सहित 11 सूत्री एजेंडों के साथ कार्यक्रम में शामिल होंगे. कार्यक्रम की सफलता को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ईं नंदलाल मांझी ने बुधवार को किसान भवन में पत्रकारों से बातचीत कर विस्तृत जानकारी दी. कहा कि हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा द्वारा आगामी 28 फरवरी को पटना के गांधी मैदान में दलित समागम की एक महारैली होने जा रही है. इसी के संबंध में कोशी प्रमंडल के विभिन्न जिलों में भ्रमण कर संगठन के लोगों को आमंत्रण दिया जा रहा है. ताकि बड़ी संख्या में पटना पहुंच कर दलित समागम को सफल बनाया जा सके. कहा कि यह समागम दलितों के राजनीति में मील का पत्थर साबित होगा. कहा कि दलित समागम का मुख्य उद्देश्य आजादी के 78 साल बीत जाने के बाद भी आज भी समाज के लोग जीवन-जीविका के लिए संघर्षरत कर रहे हैं. कहा कि जीतनराम मांझी गरीबों के नेता हैं. वे इनके आवाज को पूरी ताकत के साथ हमेशा उठाते रहे हैं. कहा कि जीतनराम मांझी जब मुख्यमंत्री थे, तब एससी-एसटी कम्युनिटी के लिए बहुत काम किये. इसमें मुख्य रूप से आर्थिक सबलता और आर्थिक रूप से ताकत देने के लिए ठेकेदारी में आरक्षण की व्यवस्था की थी. इसमें 75 लाख लोगों जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े हैं, उन्हें आरक्षण देकर सबल बनाने का योजना था. कहीं न कहीं यह योजना भी पेंडिंग है, पूरी तरह से धरातल पर नहीं है. कहा कि इस पार्टी का मूल सिद्धांत समाज के निचले पायदान पर रहने वाले लोगों को नेतृत्व का मौका देकर सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक रूप से सबल बनाना चाहते हैं. बताया कि 28 फरवरी को आयोजित समागम में बिहार समेत झारखंड, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, अंडमान निकोबार, केरल, तामिलनाडु, महाराष्ट्र आदि जगहों के लोग शामिल रहेंगे. इस समागम में गरीब लोगों का उत्थान कैसे हो, आर्थिक रूप से कैसे मजबूत हो, हमारा राजनीतिक शाख कैसे बढ़े, सामाजिक एकजुटता कैसे प्रदर्शित हो, इस पर विचार-विमर्श कर रहे है. इसके बाद आगे जो लड़ाई है, उस लड़ाई को राजनीतिक अंजाम देना चाहते हैं. कहा कि दलितों को भी मुख्य भूमिका में आना होगा. कहा कि राजनीति ही ऐसी ताकत है, जिससे विकास का ताला खुलता है. जब तक हम राजनीतिक एकजुटता और ताकत नहीं दिखाएंगे, तब तक समस्याओं का हल नहीं होगा. कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने करीब 40 हजार दलितों को टोला सेवक, विकास मित्र, तालिमी मरकज में नौकरी देकर आर्थिक सबलता देने का काम किया है. इस मौके पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह पूर्व जिला परिषद सदस्य सरिता कुमारी, जिलाध्यक्ष चंद्रधर सादा, सहरसा जिलाध्यक्ष रामरतन ऋषिदेव, नौशाद आलम, युवा जिलाध्यक्ष रमण कुमार रंजन, तुलसी सदा, ललिता देवी, मो कलीम, सब्बीर, मोहन ऋषिदेव, विजेंद्र यदव, अमरदीप शर्मा, टीरन ऋषिदेव, रवींद्र राम, आनंद जीवन कुमार आदि मौजूद थे.

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