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कार्यकर्ता के आवास पर समारोह पूर्वक मनाया गया भाकपा माले का 57वां स्थापना दिवस

Updated at : 22 Apr 2025 7:28 PM (IST)
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कार्यकर्ता के आवास पर समारोह पूर्वक मनाया गया भाकपा माले का 57वां स्थापना दिवस

माले नेता नवलकिशोर मेहता की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में वक्ताओं ने पार्टी संगठन के इतिहास के संदर्भ में विस्तार से बताया

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छातापुर. प्रखंड के राजेश्वरी पूर्वी पंचायत में भाकपा माले नेता कार्तिक शाह के आवास पर मंगलवार को पार्टी का 57वां स्थापना दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया. माले नेता नवलकिशोर मेहता की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में वक्ताओं ने पार्टी संगठन के इतिहास के संदर्भ में विस्तार से बताया और आगामी विधानसभा चुनाव में मजबूती के साथ भाजपा को हराने का आह्वान किया. भाकपा माले के जिला सचिव जयनारायण यादव ने कहा कि पार्टी की स्थापना 57 साल पूर्व 22 अप्रैल 1969 को हुआ था. गरीब एवं भूमीहिनों को हक व अधिकार दिलाने की लड़ाई के लिए गठन हुआ था. यह पार्टी नक्सलबाड़ी विद्रोह (मई 1967) के परिणामस्वरूप उभरी थी. जो पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी क्षेत्र में शुरू हुआ था. भारत के सबसे उत्पीड़ित वर्गों, विशेष रूप से किसानों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए सशस्त्र संघर्ष को प्रेरित किया गया. इस विद्रोह ने भारत की कम्युनिस्ट क्रांति में एक नया अध्याय लिखा और सीपीआई (माले) ने इसे अपनी वैचारिक नींव बनाया. जिला कमेटी सदस्य डॉ अमित चौधरी ने कहा की भाकपा माले की स्थापना सामंतवादी ताकतों के खिलाफ हुआ था. आज एनडीए के शासनकाल में बिहार में सत्ता संरक्षित अपराधियों का बोलबाला हो गया है. रोज हत्याओं का दौर जारी है. अभी दो दिन पहले ही आरा में हुए पिछड़े जातियों के लोगों की हत्या सामंतवादी ताकतों द्वारा कर दिया गया. इसके खिलाफ भाकपा माले की लड़ाई जारी है. इस दौर में भाकपा माले की जरूरत और ज्यादा बढ़ गई है. भाकपा माले तेजी से बढ़ता हुआ दल है जो की पूरे देश में मजबूत हुआ है. किसान महासभा के अध्यक्ष अच्छेलाल मेहता ने कहा कि भाकपा माले के मजबूत होने से गरीब गुरबों की मजबूती बढ़ी है. नक्सलबाड़ी विद्रोह का नेतृत्व चारु मजूमदार, कानू सान्याल और जंगल संथाल जैसे नेताओं ने किया था. यह विद्रोह भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था. जो जमींदारों और सामंती व्यवस्था के खिलाफ सशस्त्र किसान संघर्ष पर केंद्रित था. सीपीआई (माले) को अपने शुरुआती वर्षों में सरकारी दमन का सामना करना पड़ा. हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं को गिरफ्तार किया गया. कई को हिरासत में यातनाएं दी गईं या मार दिया गया. समारोह में राजेश्वर यादव, तारनी यादव, रामानंद यादव, छोटेलाल यादव, सुरेश मंडल, सचेंद्र यादव, जगदेव शर्मा, हीरा देवी, विभा देवी, चुन्नी देवी, निरसी देवी, राजो देवी, लीला देवी, मो रहमान, रंजीत राम, सत्यनारायण शर्मा, पंचू शर्मा, झींगर ऋषिदेव, सुनील मेहता मुख्य रूप से मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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