जांच में दोषी पाए जाने वालों पर होगी कार्रवाई - सीएस

सीएस जांच के लिए पहुंचे अनुमंडलीय अस्पताल, लैब टेक्नीशियन से की पूछताछ
बिना सैंपल लिए मरीज की जांच रिपोर्ट जारी करने के मामले की हुई जांच -सीएस जांच के लिए पहुंचे अनुमंडलीय अस्पताल, लैब टेक्नीशियन से की पूछताछ त्रिवेणीगंज. अनुमंडलीय अस्पताल में मरीज का बिना सैंपल लिए ही जांच रिपोर्ट जारी करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. शनिवार को मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचे. उन्होंने लैब कर्मियों से पूछताछ की और शिकायतकर्ता से भी जानकारी ली. जांच के दौरान सीएस ने ओपीडी, एक्स-रे, ईसीजी कक्ष सहित अन्य विभागों का भी निरीक्षण किया. पूछताछ के बाद सीएस ने बताया कि फिलहाल मामले की जांच चल रही है. कहा कि जांच के दौरान लैब टेक्नीशियन से पूछने पर उसने कहा कि भूलवश किसी अन्य मरीज की रिपोर्ट संबंधित मरीज के नाम पर चढ़ गई है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है कि यह तकनीकी भूल थी या जानबूझकर की गई गड़बड़ी है जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सीएस ने कहा कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा. जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है. उन्होंने बताया कि अस्पताल के उपाधीक्षक को निर्देश दिया गया है कि वे लैब और जांच प्रक्रिया पर सतत निगरानी रखें ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं हो. बताया गया कि नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 6 निवासी बाल्मीकि प्रसाद दास को बुखार की शिकायत थी. बुधवार को परिजन उन्हें इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल लाए. ओपीडी में डॉक्टर ने मरीज की सीबीसी, हिमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, यूरिन आरई, विडाल और डेंगू सहित कई जांच कराने की सलाह दी. परिजन लैब रूम पहुंचे, जहां टेक्नीशियन ने समय का हवाला देते हुए अगले दिन आने को कहा. इस पर परिजन बिना जांच कराए वापस घर लौट गए, लेकिन हैरानी तब हुई जब शुक्रवार को मरीज के पुत्र के मोबाइल पर बीआर जीओवीटी से एक मैसेज आया कि आपका लैब परीक्षण पूरा हो गया है. रिपोर्ट 31 अक्टूबर को जनरेट की जाएगी. रिपोर्ट मिलने के बाद परिजनों ने देखा कि जांच रिपोर्ट में परिणाम दर्ज हैं, जबकि ना तो सैंपल लिया गया था और न ही मरीज की जांच हुई थी. इस बात को लेकर परिजनों ने तुरंत विभाग के अधिकारियों से शिकायत की. शनिवार को सीएस की जांच के बाद भी परिजन असंतुष्ट नजर आए. उनका आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग मामले को तकनीकी भूल बताकर दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. परिजनों ने कहा कि विभागीय अधिकारी अस्पताल की लापरवाही को छिपाने के लिए औपचारिक जांच का नाटक कर रहे हैं. उनका कहना है कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ को मानवीय भूल बताकर दबाव में मामला दबाया जा रहा है. उन्होंने अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर उचित कार्रवाई की मांग की है.
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