आचार्य भिक्षु का मनाया गया 266वां अभिनिष्क्रमण दिवस

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इस अवसर पर वक्ताओं ने आचार्य भिक्षु के जीवन और विचारों पर प्रकाश डाला

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निर्मली. निर्मली स्थित तेरापंथ भवन में मंगलवार को जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के आदि पुरुष आचार्य भिक्षु के 266 वें अभिनिष्क्रमण दिवस का आयोजन श्रद्धा और साधना के साथ किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत नवाचार महामंत्र के सामूहिक उच्चारण से हुई, जिसके पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं ने ऊं भिक्षु जय भिक्षु का 15 मिनट तक सामूहिक जाप किया. इसके बाद वीध्यंहरण का 10 मिनट तक जाप किया गया और अर्हत वंदना का सामूहिक गायन हुआ. महिला मंडली की मंत्री वर्षा चोपड़ा एवं कार्यकारिणी सदस्य सोनोका नाहर ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया. इस अवसर पर वक्ताओं ने आचार्य भिक्षु के जीवन और विचारों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि आचार्य भिक्षु ने जैन धर्म में आचार, विचार और समाचारी की एकरूपता स्थापित करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया था. उनका जीवन आत्मशुद्धि और शुद्ध आचार की संकल्पना को समर्पित था. अपने सिद्धांतों के मार्ग पर चलते हुए उन्होंने कई संघर्षों का सामना किया, लेकिन उनके आत्मबल और विचारबल ने उन्हें सदैव विजय दिलाई. रामनवमी के दिन उन्होंने साधुत्व की अनेक कसौटियों को पार करते हुए शुद्ध साधुत्व की परंपरा की नींव रखी, जिसका परिणाम आज तेरापंथ धर्मसंघ की एकरूप, अनुशासित और सशक्त परंपरा के रूप में देखा जा सकता है. अंत में, जाप और गीतों की प्रस्तुतियों ने इस पावन अवसर को और अधिक दिव्य बना दिया. कार्यक्रम में सभाध्यक्ष संजय नाहर, उपाध्यक्ष आलोक नाहर, मंत्री गौतम नाहर, कार्यकारिणी सदस्य सुनील बोथरा, मोगी लाल सिंधी, सुशील चोपड़ा एवं ममता नाहर सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे.

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