सुपौल: बच्चों के अधिकार और सुरक्षा को लेकर DLSA ने चलाया विधिक जागरूकता अभियान, शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान

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कार्यक्रम में मौजूद लोग | Prabhat Khabar Network

जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल ने बच्चों के कानूनी अधिकारों और संरक्षण पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया. इस पहल का उद्देश्य बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों, शोषण से बचाव के उपायों और निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में सशक्त बनाना है.

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जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), सुपौल के तत्वावधान में बच्चों के हित, कानूनी अधिकारों और बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रावधानों को लेकर एक विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. 'नालसा (बाल-अनुकूल कानूनी सेवाएं) 2024' योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों, शोषण से बचाव के कानूनी उपायों तथा सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता के प्रति जागरूक व सशक्त बनाना था.

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कानूनी प्रावधानों और अधिकारों की दी गई विस्तृत जानकारी

अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम-सह-प्रभारी सचिव (DLSA) मो. अफजल आलम के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को उनके अधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई:

  • शिक्षा का अधिकार व बाल श्रम निषेध: बच्चों को अनिवार्य शिक्षा के अधिकार और बाल श्रम के खिलाफ बने कड़े कानूनों से अवगत कराया गया.
  • बाल विवाह व दुर्व्यवहार से सुरक्षा: बाल विवाह की रोकथाम, शारीरिक व मानसिक दुर्व्यवहार तथा हिंसा से बचाव से जुड़े कानूनी सुरक्षा कवचों की जानकारी साझा की गई.
  • निःशुल्क विधिक सहायता: किसी भी कानूनी संकट या आवश्यकता के समय जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा मिलने वाली मुफ्त कानूनी मदद और वकीलों की सुविधा के बारे में बताया गया.

'शोषण और हिंसा पर चुप न रहें बच्चे'

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को प्रेरित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि किसी भी प्रकार के शोषण, अन्याय या अधिकारों के हनन की स्थिति में बिल्कुल चुप न रहें:

  • शिकायत के माध्यम: ऐसी किसी भी परिस्थिति में बच्चे बिना किसी भय के अपने माता-पिता, शिक्षकों, संबंधित बाल संरक्षण संस्थाओं अथवा सीधे जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क कर मदद ले सकते हैं.
  • सशक्तिकरण ही सुरक्षा: वक्ताओं ने रेखांकित किया कि बच्चों को एक सुरक्षित, भयमुक्त और गरिमापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. जब बच्चे कानून के प्रति जागरूक होंगे, तभी वे अपने खिलाफ होने वाले शोषण के विरुद्ध मुखर होकर आवाज उठा सकेंगे.

आपातकालीन सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 15100

कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों और स्थानीय लोगों को बताया गया कि किसी भी प्रकार की विधिक सलाह, शिकायत या निःशुल्क कानूनी मदद के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल-फ्री नंबर 15100 अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के कार्यालय में सीधे संपर्क किया जा सकता है.

इस अवसर पर पैनल अधिवक्ता विमलेश कुमार, पारा विधिक स्वयंसेवक (PLV) रणवीर सिंह, मो. मोअज्जम सहित कई गणमान्य लोग, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित रहे.


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