भूकंप के अति संवेदनशील जोन पांच में बसा है सुपौल जिला

Updated at : 23 Jan 2020 7:32 AM (IST)
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भूकंप के अति संवेदनशील जोन पांच में बसा है सुपौल जिला

सुपौल : बिहार सरकार द्वारा जारी निर्देश के आलोक में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 21 से 28 जनवरी तक जिले में भूकंप सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है. इस कड़ी में भूकंप सुरक्षा से संबंधी उपायों का आमजनों के बीच प्रचार-प्रसार के लिए समाहरणालय परिसर से एक भ्रमणशील जागरूकता रथ को जिला पदाधिकारी महेंद्र कुमार […]

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सुपौल : बिहार सरकार द्वारा जारी निर्देश के आलोक में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 21 से 28 जनवरी तक जिले में भूकंप सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है. इस कड़ी में भूकंप सुरक्षा से संबंधी उपायों का आमजनों के बीच प्रचार-प्रसार के लिए समाहरणालय परिसर से एक भ्रमणशील जागरूकता रथ को जिला पदाधिकारी महेंद्र कुमार ने झंडी दिखा कर रवाना किया.

यह रथ 28 जनवरी तक जिले के सभी अंचल, पंचायत, गांव, चौक-चौराहे व हाट-बाजार आदि का निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भ्रमण करेगी. वहीं गीत-संगीत व नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जायेगा. भूकंप सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत जिले के विद्यालयों में एनडीआरएफ टीम द्वारा मॉक ड्रील कर बचाव की जानकारी दी जायेगी.
वहीं स्कूली बच्चों द्वारा प्रभातफेरी निकाली जायेगी. वाद-विवाद प्रतियोगिता, थाना स्तर पर संगोष्ठी तथा कार्यशाला जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जायेगा. इस अवसर पर अपर समाहर्ता अखिलेश कुमार झा, उप विकास आयुक्त मुकेश कुमार सिन्हा, जिला मुख्य प्रशिक्षक शंभु चौधरी समेत आपदा प्रबंधन, एनडीआरएफ, रेडक्रॉस के सदस्य तथा अन्य पदाधिकारी व कर्मी मौजूद थे.
गौरतलब है कि सुपौल जिला भूकंप के अतिसंवेदनशील जोन 05 में अवस्थित है. जहां विनाशकारी भूकंप की संभावना बनी रहती है. जिला प्रशासन द्वारा भूकंप के प्रति जागरूक करने एवं बचाव की जानकारी देते को लेकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है. साथ ही भूकंप से सुरक्षा के उपाय भी बताये जा रहे हैं. जो निम्नांकित है.
जिला प्रशासन द्वारा मनाया जा रहा भूकंप सुरक्षा सप्ताह
लोगों को जागरूक करने के लिए डीएम ने जागरूकता रथ को किया रवाना
क्या करें-क्या न करें
भूकंप के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए.
जैसे ही भूकंप के झटके महसूस हो, किसी मजबूत टेबुल के नीचे पाया को जोर से पकड़ कर बैठ जाएं.
यदि बिस्तर पर हो तो वहीं रहें एवं अपने सिर पर तकिया रख लें.
घर के मुख्य निकास मार्ग को खाली रखें. ताकि आपदा के समय आसानी से बाहर निकला जा सके, बाहर निकलने के लिये लिफ्ट का नहीं सीढ़ी का प्रयोग करें.
यदि बाहर हैं तो किसी खाली स्थान पर चले जाएं. मकान, पेड़, बिजली के खंभों से दूर रहें.
भूकंप के समय यदि कार चला रहे हैं तो रफ्तार धीमी कर खाली स्थान पर वाहन रोक दें तथा झटके खत्म होने के बाद ही चलें.
मकान का निर्माण हमेशा भूकंप की दृष्टिकोण से कराएं. ताकि भूकंप आने पर घर पर ज्यादा असर नहीं पड़े.
पुराने मकानों को मजबूतीकरण स्टील या तार की जाली के पट्टी से कराएं.
झोपड़ीनुमा मकान का छत चारों तरफ ढाल वाले बनाएं, यदि इस पर चदरा दे रहे हैं तो उसे जे हुक से टाइट कराएं.
भूकंपरोधी मकान बनाने के लिये साफ-सुथरा निर्माण सामग्री का प्रयोग कर मसाला का एक घंटे के अंदर उपयोग कर लें. लिंटल व छत में स्टील के छड़ का आरसीसी बीम डालें. कमरों के कोने, खिड़कियों के दोनों ओर भी बीम बनाएं. घर की सभी दीवारें एक बॉक्स की तरह बन जाना चाहिए.
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