ऑफिस में रहने के बावजूद सुनवाई में शामिल नहीं हुए डीपीओ, डीएम से कार्रवाई की अनुशंसा

Updated at : 03 Jan 2020 8:13 AM (IST)
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ऑफिस में रहने के बावजूद सुनवाई में शामिल नहीं हुए डीपीओ, डीएम से कार्रवाई की अनुशंसा

सुपौल : आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका के जिले में रिक्त 200 पदों के विरुद्ध प्रकाशित विज्ञापन के आलोक में वेबसाइट पर रिक्ति अपलोड नहीं करने एवं कार्यालय में उपस्थित रहने के बावजूद लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी कार्यालय में सुनवाई में भाग नहीं लेना डीपीओ आईसीडीएस को महंगा पड़ सकता है. जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी […]

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सुपौल : आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका के जिले में रिक्त 200 पदों के विरुद्ध प्रकाशित विज्ञापन के आलोक में वेबसाइट पर रिक्ति अपलोड नहीं करने एवं कार्यालय में उपस्थित रहने के बावजूद लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी कार्यालय में सुनवाई में भाग नहीं लेना डीपीओ आईसीडीएस को महंगा पड़ सकता है. जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अशोक कुमार झा ने इस बाबत अंतरिम आदेश जारी किया है.

जिसमें उन्होंने लोक प्राधिकार सह डीपीओ के सुनवाई में उपस्थित नहीं होने के कृत्य को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि सुनवाई में उपस्थित नहीं रहना संबंधित मामले के निवारण में लोक प्राधिकार के अरुचि को प्रदर्शित करता है. श्री झा ने मामले में अंतरिम आदेश पारित करते हुए जिला पदाधिकारी से दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की अपेक्षा जतायी है. वहीं 07 जनवरी को सुनवाई की अगली निर्धारित तिथि में लोक प्राधिकार डीपीओ को स्वयं उपस्थित होकर प्रतिवेदन दाखिल करने का आदेश जारी किया है.
स्वयं उपस्थित होकर प्रतिवेदन दें डीपीओ
जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अशोक कुमार झा ने 31 दिसंबर को इस संबंध में अंतरिम आदेश पारित कर रिक्ति अपलोड नहीं करने वाले डीपीओ एवं सीडीपीओ के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा जिला पदाधिकारी से की है.
आदेश के मुताबिक सुनवाई में परिवादी उपस्थित हुए. लेकिन लोक प्राधिकार की ओर से प्रतिनियुक्त प्रतिनिधि लिपिक दीनानाथ प्रसाद उपस्थित हुए. परिवादी द्वारा डीपीओ की अनुपस्थिति पर आपत्ति दर्ज करने पर डीपीओ के प्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि लोक प्राधिकार डीपीओ समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय में हैं.
लोक प्राधिकार का यह कृत्य लोक शिकायत निवारण से संबंधित मामले के निवारण में उनकी यह रूची को प्रदर्शित किया. प्रतिवेदन से ज्ञात हुआ कि समय-सीमा बढ़ाने हेतु निदेशालय से पत्राचार किया गया है. लेकिन निदेशालय को भेजे पत्र संबंधी साक्ष्य कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया गया. जिला लोक शिकायत पदाधिकारी ने आदेश में कहा कि रिक्ति अपलोड नहीं कर लोक प्राधिकार ने अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन नहीं किया है.
इस बिंदु पर जिला पदाधिकारी स्तर से कार्रवाई अपेक्षित है. मामला इस परिप्रेक्ष्य में और भी गंभीर हो जाता है. चूंकि इस संबंध में गत 19 दिसंबर को जारी विभागीय पत्र में यह उल्लेखित है कि निदेशालय स्तर से विज्ञापन प्रकाशन हेतु यह अंतिम अवसर है. बहरहाल मामले की अगली सुनवाई आगामी 07 जनवरी को की जायेगी. जिसमें डीपीओ को स्वयं उपस्थित होकर प्रतिवेदन दाखिल करने का आदेश दिया गया है.
क्या है मामला
निदेशक आईसीडीएस पटना ने जिले के डीपीओ एवं सभी सीडीपीओ को पत्र जारी कर जिले में रिक्त आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के चयन हेतु कार्यक्रम निर्धारित किया है. जिसमें सभी सीडीपीओ एवं डीपीओ को निश्चित रूप से रिक्तियों को आईसीडीएस के वेबसाइट पर अपलोड करने का आदेश दिया गया. आदेश में कहा गया है कि निदेशालय स्तर से विज्ञापन हेतु यह अंतिम अवसर है.
बिहार सरकार द्वारा दैनिक समाचार पत्रों में चयन से संबंधित सूचना 22 दिसंबर 2019 एवं 01 जनवरी 2020 को प्रकाशित किया गया. जिसमें ऑनलाइन आवेदन की तिथि 23 दिसंबर से 06 जनवरी तक निर्धारित है. लेकिन सुपौल जिला की रिक्ति वेबसाइट पर अपलोड नहीं किये जाने के कारण अभ्यर्थी आवेदन नहीं भर पा रहे हैं.
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