सीवान के वरिष्ठ शायर कमर सीवानी को मिला जन-साहित्य सम्मान, जानें किसने किया सम्मानित

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वरिष्ठ उस्ताद कमर सिवानी को सम्मानित करते जनवादी लेखक संघ के अधिकारी

जनवादी लेखक संघ (जलेस) सीवान ने वरिष्ठ शायर कमर सीवानी को प्रतिष्ठित जन-साहित्य सम्मान से सम्मानित किया. इस अवसर पर स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और साहित्यकारों के दायित्वों पर भी विचार-विमर्श हुआ.

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Jan-Sahitya Samman: जनवादी लेखक संघ (जलेस) सीवान के तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह एवं विशेष बुलेटिन विमोचन कार्यक्रम में वरिष्ठ उस्ताद शायर कमर सीवानी को जन-साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया. जलेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. (प्रो.) नलिन रंजन सिंह ने उन्हें सम्मानित करते हुए कहा कि कमर सीवानी जैसे वरिष्ठ साहित्यकार को सम्मानित करना उनके लिए गौरव और खुशी का विषय है.

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उन्होंने जलेस सीवान इकाई की ओर से प्रकाशित विशेष बुलेटिन की सराहना करते हुए कहा कि आज के दौर में ऐसे साहित्यिक और वैचारिक आयोजनों की बेहद जरूरत है.

कमर सीवानी ने सीवान को साहित्य में दिलायी पहचान

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने कमर सीवानी की साहित्यिक उपलब्धियों की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि कमर सीवानी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सीवान को साहित्य के क्षेत्र में नई पहचान और बुलंदियां दिलायी हैं.

स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत पर हुई चर्चा

कार्यक्रम में अरुण कुमार सिंह ने 'स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत एवं हमारा दायित्व' विषय पर आलेख प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, संविधान, नागरिकता, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद जैसी अवधारणाएं हमें स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से मिली हैं. इन मूल्यों की रक्षा करना प्रत्येक भारतीय का दायित्व है.

उन्होंने कहा कि आज स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को मिटाने और इतिहास की सच्चाई को बदलने की कोशिशें हो रही हैं. ऐसे समय में संवैधानिक मूल्यों और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत की रक्षा के लिए साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों को आगे आना होगा.

साहित्यकारों को जनविरोधी नीतियों का प्रतिरोध करना चाहिए

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. (प्रो.) राजेंद्र साह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लेखकों और कवियों ने अपने त्याग, समर्पण और सशक्त रचनाओं से जनचेतना जगायी थी. आज भी साहित्यकारों का दायित्व है कि वे जनविरोधी नीतियों का वैचारिक और रचनात्मक प्रतिरोध करें.

डॉ. (प्रो.) हारुन शैलेन्द्र ने कहा कि वर्तमान निजाम हमारी सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक विरासत को कमजोर कर समाज को पीछे ले जाने का प्रयास कर रहा है.

कई वक्ताओं ने रखे अपने विचार

कार्यक्रम में डॉ. (प्रो.) महमूद हसन अंसारी, नीरज कुमार यादव, अधिवक्ता रविन्द्र सिंह, डॉ. सुनीता और बंगाली सिंह समेत अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे.

कार्यक्रम की अध्यक्षता जलेस के कार्यकारी अध्यक्ष युगल किशोर दूबे ने की. वरिष्ठ अधिवक्ता मणिश प्रसाद सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि मंच संचालन मार्कण्डेय ने किया. जलेस के राज्य सचिव कुमार विनीताभ ने कमर सीवानी के सम्मान में सम्मान-पत्र का वाचन किया.

प्रो. उपेंद्र नाथ यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों, समाजसेवियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया.

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