सीवान में हत्याकांड के दोषी को उम्रकैद, जानलेवा हमले में सात साल की सजा

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सांकेतिक तस्वीर

सीवान में एक हत्याकांड का फैसला सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम उमाशंकर की अदालत ने दोषी लाल मोहम्मद उर्फ बेचू अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई है. हत्या के साथ-साथ जानलेवा हमले के मामले में भी उसे 7 साल की जेल और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी गई है.

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Life Threatening Attack: अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम उमाशंकर की अदालत ने गुरुवार को हत्याकांड से जुड़े मामले में दोषी एकमात्र अभियुक्त लाल मोहम्मद उर्फ बेचू अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनायी. अदालत ने अभियुक्त को भादवि की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा दी. वहीं धारा 307 के तहत सात वर्ष के कारावास के साथ 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर अभियुक्त को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

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साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलील के बाद सुनाया फैसला

अभियोजन की ओर से बहस करने वाले अपर लोक अभियोजक अच्छे लाल यादव ने बताया कि अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अभियुक्त को दोषी करार दिया. इसके बाद अदालत ने हत्या और जानलेवा हमले के मामले में सजा सुनायी.

अर्धनिर्मित मकान के बाहर सो रहे थे दो दोस्त

मामला धनौती ओपी थाना क्षेत्र के सरया गांव का है. जानकारी के अनुसार गांव निवासी आफताब अली का पुत्र जियाउल रहमान अपने दोस्त अरमान अंसारी के साथ 17 अगस्त 2023 की रात अपने अर्धनिर्मित मकान के बाहर सो रहा था. इसी दौरान रात के अंतिम पहर में गांव का ही लाल मोहम्मद उर्फ बेचू अंसारी वहां पहुंचा और धारदार हथियार से जियाउल रहमान पर हमला कर दिया.

बचाने पहुंचे दोस्त पर भी किया जानलेवा हमला

जियाउल रहमान को बचाने के लिए उसका दोस्त अरमान अंसारी आगे आया, तो अभियुक्त ने उस पर भी जानलेवा हमला कर दिया. घटना में अरमान अंसारी गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि जियाउल रहमान की मौके पर ही मौत हो गयी.

पिता के बयान पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी

घटना के बाद मृतक के पिता आफताब अली के बयान पर धनौती ओपी थाने में लाल मोहम्मद उर्फ बेचू अंसारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. मामले में प्राथमिकी संख्या 455/23 दर्ज हुई थी.

अभियोजन और बचाव पक्ष ने रखी दलील

मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक अच्छे लाल यादव ने न्यायालय में पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता धर्मनाथ सिंह ने अपना पक्ष रखा. दोनों पक्षों की दलील और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए सजा सुनायी.

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मनीष गिरि

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