महाराजगंज का मां जरती मईया मंदिर, कामाख्या धाम से जुड़ी है सिद्धपीठ की कहानी, जानिए

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जरती माई मंदिर

Maa Jarati Maiya Temple : उत्तर बिहार के सीवान जिले में स्थित मां जरती मईया मंदिर एक प्रमुख आस्था का केंद्र है, जहां कहा जाता है कि हर मनोकामना पूरी होती है. यह मंदिर तंत्र साधना और जनसहयोग से बना है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु मन्नतें लेकर पहुंचते हैं.

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Maa Jarati Maiya Temple : सीवान जिले के महाराजगंज नगर पंचायत के इंदौली गांव में गंडकी नहर के किनारे स्थित मां जरती मईया मंदिर उत्तर बिहार की प्रमुख आस्था स्थली के रूप में प्रसिद्ध है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. सावन, चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

उत्तर बिहार की प्रमुख सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध है मंदिर

महाराजगंज नगर पंचायत के इंदौली गांव के दक्षिण-पश्चिम छोर पर गंडकी नहर के किनारे स्थित मां जरती मईया का मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. पूरे वर्ष यहां भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, जबकि सावन और दोनों नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है.

जरती माई की तस्वीर
जरती माई की तस्वीर

कामाख्या धाम से जुड़ी है मंदिर की लोककथा

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इंदौली गांव के साधक झपसी सिंदुआर तंत्र साधना के लिए असम के कामाख्या धाम गए थे. साधना पूर्ण होने के बाद वे मां जरती का पिंड अपने साथ गांव लेकर आए. पहले इसकी स्थापना घर में की गई, लेकिन बाद में गांव के बाहर जंगल में विधिवत पूजा शुरू हुई. समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया और सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गया. झपसी सिंदुआर के निधन के बाद विशुनपुरा गांव के हरखु दास औघड़ पंथी ने पूजा की परंपरा को आगे बढ़ाया.

जनसहयोग से बना भव्य मंदिर

वर्ष 1990 में तत्कालीन एसडीपीओ अरविंद ठाकुर की पहल और स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर का निर्माण शुरू हुआ. वर्तमान में मंदिर परिसर में मां जरती मईया के मुख्य मंदिर के साथ भगवान शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, धर्मशाला और अन्य धार्मिक संरचनाएं मौजूद हैं. मंदिर का संचालन एक समिति करती है, जिसके पदेन अध्यक्ष अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और उपाध्यक्ष अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) होते हैं.

कई राज्यों और नेपाल से पहुंचते हैं श्रद्धालु

मां जरती मईया के दरबार में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्त रोगों से मुक्ति, संतान प्राप्ति, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की आस्था के साथ यहां पूजा-अर्चना करते हैं.

दान और जनसहयोग से होता है विकास

मंदिर संचालन समिति श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे से मंदिर परिसर का रखरखाव, रंग-रोगन, धर्मशाला का संचालन और अन्य विकास कार्य कराती है. समय-समय पर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें.

सुरक्षा और सुविधाओं की रहती है बेहतर व्यवस्था

सावन और नवरात्र जैसे विशेष अवसरों पर मंदिर समिति की स्वयंसेवक टीम श्रद्धालुओं की सुविधा में जुटी रहती है. भीड़ अधिक होने पर स्थानीय प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था संभालता है. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, ठहरने और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की जाती है.

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अफजल अनवर

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