सीवान के 342 साल पुराने इस शिव मंदिर की कहानी जानिए, जहां सावन में उमड़ती है आस्था की भीड़

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हरदियां का ऐतिहासिक शिवमंदिर

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Siwan Hardiyan Shiva Temple : बड़हरिया के हरदियां स्थित ऐतिहासिक शिवमंदिर 1684 में निर्मित हुआ था। सावन में यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। जानिए इस प्राचीन मंदिर का रोचक इतिहास।

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Siwan Hardiyan Shiva Temple : श्रावण मास के पवित्र अवसर पर बड़हरिया प्रखंड के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है. भक्त भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी महाराज की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं. महाशिवरात्रि को लेकर भी मंदिरों की विशेष सजावट की जा रही है.

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1684 में बेतिया महाराज के संरक्षण में बना था मंदिर

हरदियां गांव स्थित शिव मंदिर को क्षेत्र का सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर माना जाता है. मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित लालेश्वर पांडेय के अनुसार वर्ष 1684 में बेतिया महाराज के संरक्षण और ग्रामीणों के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण कराया गया था. उस समय गांव के कई लोग बेतिया राज में कार्यरत थे. उनके अनुरोध पर बेतिया राजमहल के शिव मंदिर की तर्ज पर इस मंदिर का निर्माण हुआ और बेतिया महाराज की उपस्थिति में भगवान शिव सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई.

अष्टधातु की मूर्ति चोरी होने की घटना आज भी चर्चा में

मंदिर के प्रधान पुजारी ने बताया कि वर्ष 2001 में चोरों ने मंदिर से अष्टधातु की बहुमूल्य मूर्ति चोरी कर ली थी. उनका दावा है कि उस मूर्ति की विशेषता यह थी कि उसकी भाव-भंगिमा मौसम के अनुसार बदलती हुई प्रतीत होती थी. इस घटना के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था मंदिर के प्रति पहले जैसी बनी हुई है.

सावन में जलाभिषेक और शिवरात्रि मेले का विशेष महत्व

हरदियां शिव मंदिर में सावन भर श्रद्धालु जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं. मंदिर की स्थापना के समय से ही यहां महाशिवरात्रि पर भव्य मेले का आयोजन होता आ रहा है. आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के श्रद्धालु भी यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

रखरखाव की जरूरत, फिर भी आस्था अटूट

ग्रामीणों का कहना है कि समय-समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाता रहा है, लेकिन बेहतर रखरखाव की आवश्यकता अभी भी है. मंदिर परिसर के सामने बड़ा जलाशय और कई बीघे जमीन है, जिससे इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है. क्षेत्र के लोगों की इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था आज भी कायम है.

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