जल्द जायेगी शिक्षकों के खातों में इपीएफ की राशि

जिले के हजारों शिक्षकों की इपीएफ संबंधी चिर परिचित मांग का समाधान जल्द हीे शुरू होने वाला है. विभाग का कहना है कि इससे संबंधित लॉगिन जनरेट हो गया है, जिससे जल्द ही इस दिशा में निदान के संकेत मिले हैं. इपीएफ की राशि शिक्षकों के वेतन मद से कटौती की जा रही है,
मनीष गिरि, सीवान. जिले के हजारों शिक्षकों की इपीएफ संबंधी चिर परिचित मांग का समाधान जल्द हीे शुरू होने वाला है. विभाग का कहना है कि इससे संबंधित लॉगिन जनरेट हो गया है, जिससे जल्द ही इस दिशा में निदान के संकेत मिले हैं. इपीएफ की राशि शिक्षकों के वेतन मद से कटौती की जा रही है, लेकिन कई महीनों की राशि उनके अकाउंट में प्रदर्शित नहीं हो रहा है. इस बात को लेकर पूर्व में शिक्षक और शिक्षक संगठन आंदोलन भी कर चुके हैं. शिक्षकों की मांग रही है कि जब प्रत्येक महीने वेतन से ईपीएफ राशि की कटौती हो रही है तो यह रुपया जा कहां रहा है? इस मामले में शिक्षा विभाग ने संज्ञान लिया. इसका निराकरण कर लिया गया है. इपीएफ का लॉगइन जनरेट हो गया है और शीघ्र ही शिक्षकों के इपीएफ पासबुक में शेष राशि प्रदर्शित होने लगेगी. कटती रही राशि, नहीं हुई जमा- नियोजित शिक्षकों के वेतन से प्रत्येक माह 1800 रुपये की कटौती की जाने लगी. कुछ समय तक शिक्षकों को मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से इसका मैसेज भी मिलता रहा और बाद में वह मैसेज आना भी कई शिक्षकों के पास बंद हो गया. लेकिन इपीएफ मद में अंशदान कटौती उनके वेतन से प्रत्येक माह निकलती रही. इसका कारण यह रहा कि अधिकांश शिक्षक इंटरनेट की दुनिया के जानकार नहीं हैं और सब शिक्षक पहले स्मार्टफोन भी अपने पास नहीं रखते थे. लेकिन इ शिक्षाकोष द्वारा ऑनलाइन हाजिरी लागू हो जाने के बाद सभी शिक्षकों को स्मार्टफोन अपने पास रखना मजबूरी बन गई. धीरे-धीरे शिक्षकों को इपीएफ योजना में अंशदान कटौती का अपडेट जानने की जिज्ञासा हुई और तब उनके होश उड़ गए. अधिकांश शिक्षकों ने जब ईपीएफओ की वेबसाइट पर जाकर अपना पासबुक देखा तब उन्हें पता चला कि सितंबर 2020 की बजाय उनका ईपीएफ अंशदान अक्टूबर 2020 से प्रदर्शित हो रहा है यानी एक महीने (सितंबर 2020) की इपीएफ का योगदान गायब हो गया. इसके बाद सितंबर 2020 से लेकर नवंबर 2024 तक की अवधि में कई शिक्षकों के विभिन्न महीनों के अंशदान का प्रदर्शन शून्य बता रहा है. कुछ शिक्षकों के 7 महीने का अंशदान गायब है तो कुछ शिक्षकों के 13 महीने का और कुछ शिक्षकों के इससे अधिक समय का अंशदान गायब है. हालांकि उनके वेतन मद से प्रत्येक माह कटौती कर ली गई है. तब फिर यह राशि गई कहां? कई महीनों की राशि नहीं हुई जमा : नियोक्ता के द्वारा भी संबंधित महीने की राशि का प्रदर्शन नहीं हो रहा था. इसका मतलब यह है कि 1800 की राशि कर्मचारी का शेयर और नियोक्ता के द्वारा 550 रूपए का शेयर और 1250 रुपए पेंशन का अंशदान कुल मिलाकर 36 सौ रूपये की राशि एक महीने में प्रत्येक कर्मचारी की गायब थी और इस तरह की राशि कई कई महीने की गायब थी. बोले अधिकारी इपीएफ के मामले में विभाग ने कारगर कदम उठाया है. इपीएफ का लॉग इन जनरेट हो गया है और शीघ्र ही शिक्षक अपने लॉगिन आइडी और पासवर्ड से अपनी इपीएफ राशि को देख सकेंगे. रजनीश झा, डीपीओ, स्थापना
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