तेजाब हत्याकांड में बहा सवा करोड़ का सरकारी खजाना
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Dec 2015 3:05 AM
सीवान : पूर्व सांसद मो शहाबुद्दीन से संबंधित तेजाब हत्याकांड शुरू से ही सुर्खियों में रहा है. एक ही परिवार के दो सगे भाइयों का अपहरण कर हत्या की घटना को अंजाम देने के मामले में विशेष अदालत ने मो शहाबुद्दीन समेत चार को दोषी करारते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. इस मुकदमे […]
सीवान : पूर्व सांसद मो शहाबुद्दीन से संबंधित तेजाब हत्याकांड शुरू से ही सुर्खियों में रहा है. एक ही परिवार के दो सगे भाइयों का अपहरण कर हत्या की घटना को अंजाम देने के मामले में विशेष अदालत ने मो शहाबुद्दीन समेत चार को दोषी करारते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. इस मुकदमे की सुनवाई तकरीबन साढ़े नौ वर्ष तक विशेष अदालत में चली. हत्याकांड में पीड़ित पक्ष के भय व आतंक की शिकायत व मामले के त्वरित निस्तारण के लिए सात जून, 2006 को सर्वोच्च न्यायालय ने मंडल कारा में ही विशेष अदालत के गठन का निर्देश दिया था.
इसके पूर्व मुकदमे की सुनवाई व्यवहार न्यायालय में चल रही थी. ऐसे में पूर्व सांसद मो शहाबुद्दीन को जेल से कोर्ट परिसर ले जाने में कानून व्यवस्था को कायम रखना भी प्रशासन के लिए चुनौती साबित होता रहा. गृह विभाग की इस रिपोर्ट व अन्य तथ्यों को संज्ञान में लेकर सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत मंडल कारा में ही गठित किये जाने का निर्देश दिया,
जिस पर अमल वर्ष 2006 के जुलाई माह से ही शुरू हो गया.औसतन प्रत्येक माह 10 दिनों तक विशेष अदालत में सुनवाई चली, जिसके लिए पटना से विशेष लोक अभियोजक को सरकारी खर्च पर सुरक्षा के बीच मुकदमे की सुनवाई के दौरान बुलाया जाता था. ऐसे में विशेष लोक अभियोजक समेत सुरक्षा में तैनात जवान व अन्य खर्च तकरीबन प्रत्येक माह 90 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक रहा. पांच वर्ष बाद वर्ष 2011 से यह खर्च औसतन प्रत्येक माह छह हजार रुपये से अधिक बढ़ गया.
यह अतिरिक्त बोझ विशेष लोक अभियोजक के कार्य दिवस के मानदेय पांच हजार से बढ़ कर छह हजार हो जाने तथा सहायक लोक अभियोजक को भी इस काम में लगा देने के चलते बढ़ा. विशेष लोक अभियोजक जेपी सिंह कहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ने मुकदमे के जल्द निस्तारण के लिए यह व्यवस्था बनायी. सहायक अभियोजक रघुवर सिंह कहते हैं कि प्रत्येक कार्य दिवस को हमें मानदेय के रूप में छह सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक दिये जाते रहे.
इसके अलावा सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर खर्च होने वाली धनराशि अतिरिक्त है. विशेष लोक अदालत में खर्च होने वाली यह धनराशि अनुमानित ही है. लेकिन मुकदमे से जुड़े बचाव पक्ष के अधिवक्ता इष्टदेव तिवारी व मो मोबिन के मुताबिक यह धनराशि और अधिक हो सकती है.
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