सीतामढ़ी. शुक्रवार को रमजान महीने का अंतिम नमाज अदा कर मुस्लिम समाज के लोगों ने अल्लाह से मुल्क में भाइचारा एवं अमन-चैन की दुआ मांगी. अलविदा जुमा की नमाज को लेकर लोगों में खासाउत्साह देखा गया. अलविदा जुमा की नमाज के बाद अब लोग इद की तैयारी में जुट गये हैं. 31 मार्च या एक अप्रैल को इद मनाया जाएगा. अलविदा जुमा की नमाज के दौरान लोगों को बताया गया कि इस्लाम धर्म में जुमा का दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है. रमजान में जुमा का महत्व और बढ़ जाता है. जुमा को छोटी इद का दर्जा हासिल है. इस वर्ष के रमजान महीने में लोगों को चार जुमे का मौका मिला. मौलाना मो खुर्शीद ने बताया कि अलविदा जुमा रमजान-2025 की विदाई का संकेत है. अलविदा जुमा के दिन लोगों ने नये कपड़े पहने. खासतौर से बच्चों ने रंग-बिरंगें नये-नये कपड़े पहनकर नमाज अदा करने को विभिन्न मस्जिद में पहुंचे थे. अलविदा नमाज में मुख्य रूप से मदरसा रहमानिया, मेहसौल के पूर्व अध्यक्ष मो अरमान अली, फैयाज आलम उर्फ सोनू बाबू, मो बशारत करीम गुलाब, हाजी मो हशमत हुसैन, मौलाना मो सोहराब, इमाम खुर्शीद आलम, अब्दुल वदूद, मो जौहर अली ताज, अरशद सलीम, हाफिज मो निजाम, मो मुर्तुजा, मो अलीमुल्लाह, मो अफरोज आलम, तौकीर अनवर उर्फ सिकंद, मो मजहर अली राजा, हाजी अब्दुल्लाह रहमानी, मो जुनैद आलम, मो सोहैल अख्तर व अताउल्लाह रहमानी समेत सैकड़ोंं की संख्या में लोग शामिल हुए. मदरसा रहमानिया मेहसौल स्थित मस्जिद के इमाम मौलाना मो मजहर कासमी ने अलविदा जुमा की तकरीर में कहा कि शरीअत में अलविदा जुम्मा का कोई विशेष महत्व नहीं है. रमजान के अन्य जुर्म पर अलविदा जुम्मा को फौकीयत नहीं दी गयी है, पर इद से पहले होने वाला यह जुमा खुद ही खास हो जाता है. इमाम मौलाना मो मजहर कासमी ने कहा कि अजमत, बरकत, रहमत एवं मगफिरत का महीना हमसे विदा होने वाला है. अब यह आने वाले वर्ष में ही मिलेगा. यह अशरा का विशेष महत्व होता है कि यह मगफिरत का होता है.
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