बकाया भुगतान नहीं करने पर किया प्रदर्शन

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पिछले पांच वर्ष से रीगा चीनी मिल बंद रहने तथा गन्ना मूल्य का बकाया करीब 52 करोड़ से अधिक रुपये के भुगतान नहीं होने से आक्रोशित स्थानीय गन्ना किसानों ने मिल बाजार में प्रदर्शन किया.

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रीगा. पिछले पांच वर्ष से रीगा चीनी मिल बंद रहने तथा गन्ना मूल्य का बकाया करीब 52 करोड़ से अधिक रुपये के भुगतान नहीं होने से आक्रोशित स्थानीय गन्ना किसानों ने मिल बाजार में प्रदर्शन किया. कहा कि रीगा में चीनी उद्योग, डिस्टिलरी के साथ-साथ उर्वरक का कारखाना भी था, जो विगत पांच वर्ष से बंद है. सरकार के नये उद्योग लगाने तथा बंद उद्योगों को चालू कराने का संकल्प यही है कि रीगा का चालू चीनी मिल भी बंद हो गया. स्थायी/अस्थायी लगभग एक हजार कामगार, 40 हजार किसान तथा उसके चार-पांच लाख परिजन समेत हजारों व्यवसायी तथा दैनिक मजदूरों का जीवन इससे जुडा हुआ था. सरकारी लापरवाही से लाखों लोग सड़क पर आ गया है. गन्ना मूल्य नहीं मिलने से किसान-मजदूर कर्जदार बन चुके हैं. एनसीएलटी द्वारा मिल बेचने का दो निविदा रद्द हो गया. हल्दिया कंपनी तथा भारत एग्रो दो करोड सुरक्षा राशि छोड़कर भाग गया. अब तीसरा निविदा 27 मई को खुलना है. नाउम्मीदी के कारण सीतामढी तथा मिल क्षेत्र के किसान वोट के प्रति उदासीन है. मिल नही तो वोट नही का ऐलान करने वालों में मोर्चा नेता पारस नाथ सिंह, नरेश झा, धर्मप्रकाश प्रसाद, रामजन्म गिरी, कौशलकिशोर सिंह, अनिल ठाकुर व दुर्गा पंडित समेत दर्जनों किसान शामिल थे.

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