sitamarhi news : जांच घर और चिकित्सक के खिलाफ मिली शिकायत पर डीएम गंभीर

Edited by VINAY PANDEY
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शहर में बड़ी संख्या में जांच घर है. जिला प्रशासन के स्तर से जांच में कई जांच घरों के खिलाफ कार्रवाई भी हो चुकी है.

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सीतामढ़ी. शहर में बड़ी संख्या में जांच घर है. जिला प्रशासन के स्तर से जांच में कई जांच घरों के खिलाफ कार्रवाई भी हो चुकी है. इस बीच, डीएम को फिर एक जांच घर और चिकित्सक के खिलाफ शिकायत मिली है. उन्होंने उक्त शिकायत की जांच सिविल सर्जन को सौंपी है. यह शिकायत जानकी स्थान निवासी मदन प्रसाद के पुत्र सुनील कुमार ने की हैं. कुमार ने डीएम से शिकायत में एक ही जांच घर नहीं, बल्कि शहर के तमाम जांच घरों में होने वाली जांच की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा किया है. दरअसल, कुमार को एक जांच घर से दो तरह की जांच रिपोर्ट मिलने पर डीएम से शिकायत की है.

— शुगर जांच की दो रिपोर्ट पर सवाल

कुमार ने बताया कि छह अप्रैल 25 को शहर के एक बड़े चिकित्सक से दिखाया. उन्हें शुगर जांच कराने की सलाह दी गई. चिकित्सक का कंपाउंडर बगल के एक जांच घर के कर्मी को बुला लिया. उसने बल्ड का नमूना लिया. बताया कि भोजन के बाद नमूना दिया था. बाद में उन्हें खाली पेट नमूना दिया था. पहली बार की रिपोर्ट में शुगर का लेवल 210 बताया गया. कुमार विज्ञान के छात्र रहे है. इस लिहाज से उन्हें पता था कि शुगर का लेवल 75-110 होता है. उन्हें रिपोर्ट पर शंका हुई. उनकी रिपोर्ट पर चिकित्सक के कर्मी ने एक बार फिर जांच कराकर शंका दूर कर लेने की बात कही. बाद में जांच कराने पर वही जांच घर शुगर नहीं होने का रिपोर्ट दिया.

— चिकित्सक को दिखाई दोनों रिपोर्ट

आवेदक कुमार ने चिकित्सक को जांच घर की पहली रिपोर्ट दी, तो उन्हें शुगर का लेवल देख हैरानी हुई और वे उक्त रिपोर्ट के आलोक में दवा लिखने ही वाले थे कि पीड़ित ने दूसरी रिपोर्ट दिखाई. तब डॉक्टर ने उन्हें नियमित व्यायाम करने व टहलने की सलाह के साथ गैस्ट्रिक की दवा लिख दी. शहर के इस सजग व्यक्ति ने डीएम से शिकायत की है कि अगर प्रथम रिपोर्ट पर चिकित्सक द्वारा दवा लिखा गया होता, तो उनका क्या हाल हुआ होता. कहा है कि शुगर का लेवल देखकर चिकित्सक को स्वविवेक से भी मरीज का परीक्षण करना चाहिए था. यह देखना चाहिए था कि जब शुगर का लेवल बढ़ा है, तो उससे मरीज को कौन-कौन सी परेशानी है, लेकिन चिकित्सक उनसे कुछ भी पूछताछ नहीं किए और सीधे जांच घर की रिपोर्ट पर ही दवा लिखने लगे. कुमार का आरोप है कि अधिकांश चिकित्सक ऐसा ही करते है, जो मरीजों के लिए बड़ा घातक है. उसने सवाल उठाया है कि एक चिकित्सक का नाम तीन से पांच जांच घरों के बोर्ड पर लगा रहता है, जबकि जांच वैसा कर्मी करता है, जो न तो विज्ञान का छात्र रहा है और न जांच की विधिवत शिक्षा ली है. ऐसे में एक चीज की जांच में दो तरह की रिपोर्ट आनी स्वाभाविक है. आवेदक ने डीएम का उक्त बिंदुओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराकर उचित कार्रवाई की मांग की है. उसने डीएम को चिकित्सक और जांच घर के नामों की भी जानकारी दी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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