जिस एके 56 से इंजीनियरों की हुई हत्या, वह बरामद

Updated at :15 Jul 2016 7:22 AM
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जिस एके 56 से इंजीनियरों की हुई हत्या, वह बरामद

सीतामढ़ी/पटना : एसटीएफ ने संतोष झा गिरोह के संरक्षणदाता विजय झा व राघव झा (दोनों भाई) को गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी बुधवार की देर रात टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर सीतामढ़ी थाने के पुनौरा गांव स्थित उनके घर से हुई. उनके पास से एक पिस्टल व दो मैगजीन भी बरामद किये गये. बाद […]

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सीतामढ़ी/पटना : एसटीएफ ने संतोष झा गिरोह के संरक्षणदाता विजय झा व राघव झा (दोनों भाई) को गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी बुधवार की देर रात टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर सीतामढ़ी थाने के पुनौरा गांव स्थित उनके घर से हुई. उनके पास से एक पिस्टल व दो मैगजीन भी बरामद किये गये.
बाद में विजय झा की निशानदेही पर एसटीएफ ने संतोष झा के चचेरेे भाई संजय झा को शिवहर दोस्तिया गांव से पकड़ा और उसके पास से एके-56, 25 कारतूस, हिरण की छाल बरामद की. माना जा रहा है कि इसी एके-56 से गोपालगंज व दरभंगा में निर्माण कंपनियों के इंजीनियरों की हत्या की गयी थी. संजय की निशानदेही पर गिरोह के लिए काम कर रहे आदित्य कुमार त्रिवेदी को भी शिवहर के पिपराही से पकड़ा गया. चारों को पहले पुनौरा ओपी पर रख कर ऑपरेशन में शामिल एसटीएफ व पुलिस के स्थानीय अधिकारियों ने घंटों पूछताछ की. फिर गुरुवार की सुबह 9:30 बजे एसटीएफ चारों को अपने साथ दरभंगा ले गयी.
वहां पूछताछ के बाद विजय झा के भाई राघव झा को निर्दोष पाते हुए छोड़ दिया गया. पुलिस सूत्रों की मानें, तो संजय व विजय ने संगठन के कई राज खोले हैं, जिनसे जल्द संगठन को संरक्षण देनेवालों की गिरफ्तारी हो सकती है. गिरोह के शार्प शूटर विकास झा उर्फ कालिया ने इंजीनियर हत्याकांड में गिरफ्तार होने के बाद पुलिस को बताया था कि संगठन के पास तीन एके-47, तीन कारबाइन व 11 पिस्टल हैं.
जेल से मिला एके-56 का सुराग
पुलिस सूत्रों के अनुसार दरभंगा जेल में बंद विकास झा उर्फ कालिया पर पुलिस की पैनी नजर थी. पुलिस को पता चल चुका था कि जेल में विकास के पास मोबाइल उपलब्ध है. उसके नंबर को प्राप्त करने के बाद उसे सर्विलांस पर लिया गया. इसका परिणाम एके-56 समेत चार की गिरफ्तारी है. सूत्रों के अनुसार मुकेश पाठक की गिरफ्तारी के बाद विकास ने जेल से विजय झा को मोबाइल पर कोड वर्ड में कहा कि बड़का सामान के पुरनका जगह पर ठिकाना लगा दे. विकास का संकेत मिलने के बाद विजय ने रातोंरात एके-56 को संजय झा को सौंप कर लौट गया.
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