रंगदारी से बड़ी रकम वसूल चुका है भाई जी गिरोह

सीतामढ़ी : जिले में आतंक का पर्याय बना हरेंद्र सहनी उर्फ भाई जी का गिरोह पिछले चार माह के दौरान रंगदारी के रुप में बड़ी रकम वसूल चुका है. विगत दिनों सोनबरसा थाने की पुलिस के हत्थे चढ़ा गिरोह का सक्रिय सदस्य बुधन ठाकुर ने पूछताछ के दौरान उक्त खुलासा किया है. बुधन मेजरगंज थाना […]
सीतामढ़ी : जिले में आतंक का पर्याय बना हरेंद्र सहनी उर्फ भाई जी का गिरोह पिछले चार माह के दौरान रंगदारी के रुप में बड़ी रकम वसूल चुका है. विगत दिनों सोनबरसा थाने की पुलिस के हत्थे चढ़ा गिरोह का सक्रिय सदस्य बुधन ठाकुर ने पूछताछ के दौरान उक्त खुलासा किया है. बुधन मेजरगंज थाना क्षेत्र के मरपा ईश्वर दास गांव का रहनेवाला है.
गिरोह के माध्यम से हरेंद्र सहनी को अब तक 4.20 लाख रुपये का भुगतान मिल चुका है. फरवरी माह में भाई जी के नाम का खौफ खाकर रीगा बाजार के प्रमुख मिठाई दुकानदार रामाशंकर साह ने 3.20 लाख रुपये का भुगतान कर दिया. गिरोह के रवि एवं अवधेश पूर्व में रामाशंकर साह की दुकान पर रंगदारी का परचा व मोबाइल गिराया था, जिसमें 10 लाख रंगदारी की मांग की गयी थी. हरेंद्र सहनी के कॉल करने पर रंगदारी की उक्त रकम दी गयी थी.
पहले फेज में दुकानदार ने 1.60 लाख तथा फिर दूसरे फेज में इतनी हीं रकम बुधन के माध्यम से हरेंद्र सहनी तक पहुंचाया गया था. बुधन ने यह भी बताया है कि रीगा के एक किराना दुकानदार गुड्डु मारवाड़ी से भी उसने गिरोह के नाम पर एक लाख रुपये वसूल किये थे. उक्त रकम उसने धर्मेंद्र कुमार उर्फ राज के साथ मिल कर हासिल किया था. उत्तरी बिहार युवा आर्मी लिबरेशन पार्टी नामक आपराधिक संगठन बना कर पुलिस के लिए सिरदर्द बना हरेंद्र सहनी ने अपने गिरोह के माध्यम से अब तक करीब डेढ़ दर्जन से अधिक व्यवसायियों से रंगदारी की मांग कर चुका है. रंगदारी मांगने का काम रवि और अवधेश संभाला था. उक्त दोनों दुकान के साइन बोर्ड पर अंकित मोबाइल नंबर को लिख कर सरगना हरेंद्र सहनी को दे देता था. इसके बाद हरेंद्र सहनी रंगदारी की मांग करने के लिए अलग से मोबाइल व परचा भेज कर दहशत फैलाने का काम करता था.
कृष्णा के घर रची थी हत्या की साजिश
12 जनवरी 2016 को सुप्पी सहायक थाना के बराहीं चिंतामन चौक स्थित किशन ट्रेडर्स के मालिक उदय कुमार सिंह की हत्या मामले का भी बुधन ने खुलासा किया है. उसने यह बताया है कि सीमेंट व्यवसायी उदय सिंह की हत्या का मकसद भाई जी के नाम का खौफ पैदा करना था.
यह अन्य व्यवसायियों से सहज तौर पर रंगदारी की राशि मिलने की कवायद थी. उदय सिंह की हत्या की साजिश बैरगनिया में कृष्णा साह के घर पर रची गयी थी. उक्त मीटिंग में यह तय किया गया कि दहशत फैलाने के लिए किसी न किसी व्यवसायी की हत्या करना होगा, तभी आसानी से पैसा आयेगा.
हत्या से पूर्व बुधन ने की थी रेकी
हरेंद्र ने हीं उदय सिंह का काम तमाम करने की योजना को अमलीजामा पहनाया था. उसके इशारे पर हत्या से पूर्व बुधन ठाकुर एवं मो हासिम ने कृष्णा साह के होंडा बाइक पर सवार होकर उदय सिंह के दुकान की रेकी की थी. रेकी करने के बाद वह दोनों बैरगनिया वापस लौट गया. वहां दो बाइक जिसमें एक हासिम भी बाइक थी, से मनियारी चौक पर रूका. तब हरेंद्र और कृष्णा द्वारा दुबारा देखने गया. अर्जुन से हथियार लेकर वापस मनियारी चौक पर आया.
हरेंद्र व अनिल ने चलायी थी गोली
हरेंद्र एवं अनिल साह एक एक पिस्टल रखा था. बुधन ठाकुर के साथ हाशिम एक बाइक से आगे गये तथा कुछ देर बाद पल्सर से अनिल साह, हरेंद्र सहनी एवं कृष्णा आया. उदय सिंह की दुकान के पास पहुंच कर हरेंद्र सहनी एवं अनिल साह अपने-अपने पिस्टल से फायर कर उदय सिंह की हत्या कर दी. फायर होते ही कृष्णा बाइक लेकर हरेंद्र सहनी के पास गया, जिस पर बैठ कर दोनों भाग निकला. भागने के क्रम में बुधन ने अपने अन्य सहयोगियों के साथ भाई जी जिंदाबाद के नारे भी लगाये.
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