किताब का पता ही नहीं कैसे होगा मूल्यांकन !

Updated at :18 Apr 2016 2:02 AM
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किताब का पता ही नहीं कैसे होगा मूल्यांकन !

डुमरा /सीतामढ़ी : शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए राज्य सरकार के स्तर से अब तक न जाने कितने कदम उठाये गये हैं, पर व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ है. कागज पर भले हीं विभागीय अधिकारी व्यवस्था में सुधार का लाख दावा करे, पर हकीकत से शायद हीं कोई अनजान हैं. अब तक […]

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डुमरा /सीतामढ़ी : शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए राज्य सरकार के स्तर से अब तक न जाने कितने कदम उठाये गये हैं, पर व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ है. कागज पर भले हीं विभागीय अधिकारी व्यवस्था में सुधार का लाख दावा करे, पर हकीकत से शायद हीं कोई अनजान हैं.

अब तक नहीं मिलीं किताबें
यह व्यवस्था का हीं दोष है कि नये सत्र में प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में पढ़ाई शुरू हो गयी है, लेकिन अब तक बच्चों को किताबें नहीं मिल सकी है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि व्यवस्था में किस हद तक सुधार हुआ है. खास बात यह कि अब हर माह बच्चों के पठन-पाठन के मूल्यांकन के लिए परीक्षा होगी. जानकारों का कहना है कि जब बच्चों को किताब मिली हीं नहीं तो उनका मूल्यांकन होगा खाक.
ऐसा कोई पहली बार नहीं
नये सत्र का पहला महीना अब 14 दिन शेष है. अब भी किताब का कोई अता- पता नहीं है. विभाग के अधिकारी भी यह बताने की स्थिति में नहीं है कि बच्चों को कब तक किताबें मिल पायेगी.
हालांकि, जिला से सरकार को बराबर इस बाबत रिपोर्ट किया जा रहा है. यह पहली बार नहीं है कि बच्चों को सरकार से किताबें मिलने में विलंब हो रही है. जब से सरकार अपनी ओर से बच्चों को किताबें देना शुरू की, तब से हीं विलंब वाली स्थिति बनी हुई है.
गत वर्ष तो चार-पांच माह बाद कई कक्षाओं की किताबें सरकार द्वारा भेजी गयी थी. कक्षा आठ के लिए कुछ प्रखंडों के लिए किताबें नहीं आयी थी. यह हकीकत है शिक्षा व्यवस्था का.
खास बात यह कि मार्केट में सरकारी स्कूलों की किताबें नहीं मिलती है ताकि अभिभावक खरीद कर अपने बच्चों को दे सके. स्थिति यह है कि बच्चे स्कूल तो जाते हैं, उन्हें एमडीएम भी मिलता है, लेकिन पठन-पाठन के नाम पर खानापूर्ति कर घर लौट आते हैं. सूत्रों ने बताया कि जिला से हर वर्ष सरकार से जितनी संख्या में किताबों का डिमांड किया जाता है, उतनी संख्या में नहीं मिल पाती है. ताजा मामला यह है कि कक्षा छह के 63113 में से मात्र 49949 एवं कक्षा सात के 57042 में से मात्र 48351 बच्चों के लिए किताबें मिल सकी है.
जिले में कुल 2099 स्कूल
बता दें कि जिले के सभी 17 प्रखंडों में 2099 प्राथमिक व मध्य विद्यालय है, जिसमें लाखों बच्चे पढ़ते हैं. खास कर आर्थिक रूप से कमजोर लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाते हैं. शिक्षा परियोजना की माने तो कक्षा एक से पांच एवं कक्षा आठ के लिए अब तक किताब के नाम पर कागज का एक टुकड़ा भी नहीं मिल सका है.
कहते हैं प्रधान शिक्षक
मध्य विद्यालय, उखड़ा एवं मध्य विद्यालय रोहुआ के प्रधान शिक्षक पंकज कुमार व वीरेंद्र कुमार चंचल ने बताया कि बच्चों को किताबें नहीं मिली है. पुरानी किताबों से जैसे-तैसे पढ़ाया जा रहा है. बीआरसी से किताबों को लाने में वाहन का खर्च जेब से देना पड़ता है.
कहते हैं अधिकारी
इस बाबत सर्वशिक्षा अभियान के डीपीओ प्रेमचंद्र ने बताया कि अब तक किताबों का वितरण न होना चिंता का विषय है. सिर्फ कक्षा छह व सात के बच्चों के लिए किताबें मिली है. वह भी सभी बच्चों के लिए नहीं है. किताबों के लिए यहां से प्रतिदिन सरकार को रिपोर्ट किया जा रहा है.
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