तब स्वतंत्रता संग्राम के लड़ाकों का एक ही था लक्ष्य ''आजादी''

बैरगनिया :प्रखंड के क्षेत्र के आदमवान निवासी स्वतंत्रता सेनानी राजेंद्र प्रसाद सिंह ने आजादी की लड़ाई के बाद देश में स्थापित गणतांत्रिक व्यवस्था व वर्तमान समय में इसके बदलते स्वरूप पर विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्होंने 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया था. उस समय स्वतंत्रता सेनानियों का […]
बैरगनिया :प्रखंड के क्षेत्र के आदमवान निवासी स्वतंत्रता सेनानी राजेंद्र प्रसाद सिंह ने आजादी की लड़ाई के बाद देश में स्थापित गणतांत्रिक व्यवस्था व वर्तमान समय में इसके बदलते स्वरूप पर विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्होंने 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया था.
उस समय स्वतंत्रता सेनानियों का एक ही लक्ष्य था देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराना. लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ व हमारे स्वतंत्रता सेनानी व विद्वान मनीषियों ने रात-दिन के प्रयास के बाद अपने देश मे लोकतांत्रिक संविधान का निर्माण किया.
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