सीतामढ़ी : पुराने दिग्गज बाहर, नये समीकरण पर चुनाव, राजद के अर्जुन राय और जदयू के सुनील कुमार पिंटू आमने-सामने
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 May 2019 6:09 AM (IST)
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अमिताभ सीतामढ़ी : सीतामढ़ी संसदीय क्षेत्र का इस बार का चुनाव कई मायनों में खास है. पिछले चुनाव में जो दो दिग्गज आमने-सामने थे, वे दोनों ही चुनाव मैदान से बाहर हैं. सांसद रामकुमार शर्मा (रालोसपा) को पार्टी ने टिकट नहीं दिया, क्योंकि सीट राजद के खाते में चली गयी. दूसरी तरफ राजद ने पिछले […]
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अमिताभ
सीतामढ़ी : सीतामढ़ी संसदीय क्षेत्र का इस बार का चुनाव कई मायनों में खास है. पिछले चुनाव में जो दो दिग्गज आमने-सामने थे, वे दोनों ही चुनाव मैदान से बाहर हैं. सांसद रामकुमार शर्मा (रालोसपा) को पार्टी ने टिकट नहीं दिया, क्योंकि सीट राजद के खाते में चली गयी. दूसरी तरफ राजद ने पिछले लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे सीताराम यादव की जगह इस बार अर्जुन राय को टिकट दिया है. जदयू ने अंतिम समय में यहां से अपना प्रत्याशी बदलकर डॉ वरुण कुमार की जगह सुनील कुमार पिंटू को अपना उम्मीदवार बनाया है.
वैसे चुनाव मैदान में आमने-सामने खड़े एनडीए के प्रत्याशी सुनील कुमार पिंटू (जदयू) और महागठबंधन के अर्जुन राय (राजद) क्षेत्र के पुराने चेहरे हैं. पिंटू भाजपा के टिकट पर तीन टर्म नगर से विधायक रह चुके हैं, तो अर्जुन राय जदयू के टिकट पर एक बार सांसद निर्वाचित हो चुके हैं.
दोनों दलीय प्रत्याशियों के बीच निर्दलीय माधव चौधरी भी मैदान में हैं. चौधरी पिछले दो साल से सामाजिक कार्यों के जरिये अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे थे. यादव व मुस्लिम समीकरण के आधार पर सीतामढ़ी में 1989 से 2009 तक लगातार छह बार जनता दल और राजद प्रत्याशी के सिर पर विजयी का सेहरा बंधते रहे.
2009 में राजद का किला ध्वस्त करते हुए जदयू के टिकट पर अर्जुन राय सांसद बने. 2014 में मोदी लहर में रालोसपा प्रत्याशी रामकुमार शर्मा को सांसद बनने का मौका मिला. अर्जुन राय के पक्ष में समीकरण यह है कि राजद के वोट बैंक के अलावा रालोसपा भी उनके साथ है.
दूसरी तरफ सुनील कुमार पिंटू की ताकत भाजपा के परंपरागत वोट बैंक के साथ जदयू का भी साथ है. सीतामढ़ी के कई इलाकों में कुशवाहा आबादी अच्छी खासी संख्या में है. रालोसपा नेतृत्व से बागी सांसद रामकुमार शर्मा एनडीए के पक्ष में उतर गये हैं और महागठबधन के वोट बैंक में सेंधमारी के लिए उन्होंने अपनी ताकत झोंक दी है.
चुनाव की घोषणा के साथ ही दोनों दल के प्रत्याशी जातीय आधार पर अपने वोट बैंक को समेटने के साथ-साथ दूसरे के वोट में सेंधमारी करने में लगे हुए है. खासतौर पर एनडीए प्रत्याशी कुशवाहा व महागठबंधन प्रत्याशी वैश्य जाति के मतदाताओं को अपने-अपने पक्ष में करने में लगे हैं.
एनडीए प्रत्याशी के समर्थन में चुनावी सभा कर रहे स्टार प्रचारक देशहित व विकास कार्यों का हवाला देते हुए मजदूरी के रूप में वोट की मांग कर रहे है. वहीं महागठबंधन के स्टार प्रचारक संविधान पर खतरा, देश में सांप्रदायिक तनाव, भ्रष्टाचार व अपराध का हवाला देते हुए वोट मांग रहे हैं.
ये रहे हैं सांसद
1989, हुकुमदेव नारायण यादव, जनता दल
1991, नवल किशोर राय, जनता दल
1996, नवल किशोर राय, जनता दल
1999, नवल किशोर राय, जनता दल
1998, सीताराम यादव राजद
2004, सीताराम यादव राजद
2009, अर्जुन राय जदयू
2014, रामकुमार शर्मा रालोसपा
जीत के लिए ताल ठोंक रहे हैं सभी प्रत्याशी
छह विस क्षेत्रों में से तीन पर राजद का कब्जा
विधायक पार्टी विधानसभा
सुनील कुमार कुशवाहा राजद सीतामढ़ी
मंगीता देवी राजद रून्नीसैदपुर
सैयद अबु दोजाना राजद सुरसंड
दिनकर राम भाजपा बथनाहा (सुरक्षित)
गायत्री देवी भाजपा परिहार
डॉ रंजु गीता बाजपट्टी जदयू
वोटर मौन, बोल रहे नेता
सीतामढ़ी से सटा सीमरा गांव. सुबह छह बजे चाय की दुकान पर कुछ लोग बैठे हैं. बातचीत
चुनाव पर चली तो एक ने कहा, इस बार लग ही नहीं रहा कि चुनाव हो रहा है. गिनती के लोग प्रत्याशी के प्रचार-प्रसार में लगे हुए है. बात आगे बढ़ी तो देवेंद्र प्रसाद यादव बोले, लोग मन बना चुके है कि कहां वोट करना है. आपस में रिश्ता खराब होने की आशंका को लेकर मतदाता खामोश हैं. बोले- वोट तो उसी को जो विकास करेगा. बगल में बैठे अशोक कुमार ने कहा कि इस बार राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए मतदान होगा. चाय पी रहे विनोद पासवान बोले- बात तो ठीक है, लेकिन मतदान आते-आते लोग तो जातीय आधार पर गोलबंद हो जाते हैं.
1957 में जेबी कृपालानी जीते थे
यहां कभी समाजवाद का बोलबाला था. 1957 में आचार्य जेबी कृपलानी यहां से सांसद चुने गये थे. विपक्षी दल कांग्रेस ने उनके विरोध में प्रत्याशी तक नहीं उतारा था. इसी प्रकार जननायक कर्पूरी ठाकुर तत्कालीन सोनबरसा विधानसभा से विधायक बने थे. सीतामढ़ी का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां के मतदाताओं में समाजवादी चिंतन के नेताओं को प्रतिनिधि बनाने में विशेष अभिरुचि रही है.
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