कॉलेज के कुछ शिक्षकों ने की थी बोर्ड से शिकायत

Published at :11 May 2018 5:24 AM (IST)
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कॉलेज के कुछ शिक्षकों ने की थी बोर्ड से शिकायत

सीतामढ़ी : छात्रों से अवैध वसूली के मामले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल कॉलेज, बैरगनिया के पूर्व प्राचार्य सह सचिव प्रो विनोद कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया गया है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव के आदेश के आलोक में डीइओ जयशंकर प्रसाद ठाकुर ने बैरगनिया बीइओ को 24 घंटे के […]

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सीतामढ़ी : छात्रों से अवैध वसूली के मामले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल कॉलेज, बैरगनिया के पूर्व प्राचार्य सह सचिव प्रो विनोद कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया गया है. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव के आदेश के आलोक में डीइओ जयशंकर प्रसाद ठाकुर ने बैरगनिया बीइओ को 24 घंटे के अंदर प्राथमिकी दर्ज करा रिपोर्ट करने को कहा है.

प्राध्यापक पर भी कार्रवाई: कॉलेज के प्राध्यापक फणींद्र कुमार चौधरी भी बुरी तरह फंस गये है. उनके खिलाफ भी प्राथमिकी कराने का आदेश दिया गया है. श्री चौधरी पर एक ही समय में दो जगहों पर कार्य करने एवं दोनों जगहों से वेतन/अनुदान का लाभ लेने का आरोप है. जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है.
कॉलेज की संबद्धता रद्द: उक्त अवैध कार्यशैली के चलते बोर्ड ने कॉलेज की संबद्धता को रद्द कर दिया है. डीइओ ने इस आशय की जानकारी डीएम को भी दी है.
क्या है पूरा मामला
कॉलेज के हिंदी विभाग के प्राध्यापक सुनील कुमार जायसवाल व अन्य ने बोर्ड से लिखित शिकायत की थी कि छात्रों से पंजीयन के नाम पर अवैध वसूली की गयी है. उनकी माने तो वर्ष 2017 में 1200-1300 इंटर की परीक्षा में शामिल हुए थे. उक्त छात्रों से पंजीयन शुल्क प्रति छात्र 350 रुपया लिया जाना था, लेकिन प्रत्येक छात्रों से 700 रुपये की दर से वसूल किया गया था. इसके अलावा शिक्षकों के बीच अनुदान वितरण में गड़बड़ी का गंभीर आरोप आरोप लगाया था.
बोर्ड के आदेश पर डीइओ द्वारा पीओ रामजी पासवान से आरोपों की जांच करायी गयी थी. जांच में दोनों आरोपों की पुष्टि के बाद डीइओ ने बोर्ड से प्राचार्य सह सचिव के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की अनुशंसा की थी. रिपोर्ट के अवलोकन के बाद बोर्ड ने पाया था कि प्राचार्य का उक्त कृत्य बिहार विद्यालय परीक्षा समिति संबद्धता नियमावली 2011 के विरुद्ध है.
प्रशासन की नजर से नहीं बच पाये डुमरा एमओ
शराबबंदी होने एवं कड़ा कानून बनाये जाने के बाद भी जिले में शराब की बिक्री बंद नहीं है. कार्रवाई भी की जा रही है. फिर भी शराब का अवैध धंधा जारी है. प्रभात खबर ने अपनी पड़ताल में पाया है कि एमओ राकेश रंजन कोई पहला सरकारी सेवक नहीं है, जो नशे में गिरफ्तार किये गये है. उनसे पूर्व आधा दर्जन से अधिक अधिकारी व कर्मी पकड़े गये गये थे. खास बात यह कि नशे में पकड़े गये कुछ सरकारी सेवकों के जेल जाने के बावजूद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट नहीं किया गया.
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